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विदिशा में इंडियन ऑयल लगाएगा सीबीजी प्लांट, पराली से किसानों की होगी अतिरिक्त आय

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसीएल) विदिशा जिले में कंप्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) प्लांट स्थापित कर रहा है। यह प्लांट मक्का, धान, गेहूं सहित अन्य फसलों के अवशेषों का उपयोग कर किसानों को अतिरिक्त आय प्रदान करेगा। वर्तमान में किसान इन अवशेषों को जला देते हैं, जिससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान होता है। इस पहल से नरवाई जलाने की घटनाओं में कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के सचिव निशांत वरवड़े ने प्लांट स्थापना की कार्यवाही शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए हैं, जिसके लिए 15-20 एकड़ सरकारी जमीन की तलाश की जा रही है।

किसान आंदोलन समाप्त: सरकार ने मूंग खरीदी दायरा बढ़ाया, ई-टोकन व्यवस्था स्थगित

किसानों के दो दिवसीय आंदोलन के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने मूंग खरीदी का दायरा 25% से बढ़ाकर 60% कर दिया और खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दी। मुख्यमंत्री निवास से महज एक किलोमीटर दूर तक पहुंचे किसानों ने 22 बैरिकेड तोड़े थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा गठित मंत्रियों की समिति ने किसान नेताओं से दो घंटे चर्चा की, जिसके बाद देर रात आंदोलन समाप्त हो गया। हालांकि, किसानों की 100% मूंग खरीदी की मूल मांग अभी पूरी नहीं हुई है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खंडवा में 82 लाख से अधिक किसानों के खातों में 3300 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खंडवा में ‘बलराम कृषि महोत्सव’ में शामिल हुए, जहां उन्होंने मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत 82 लाख से अधिक किसानों के खातों में 3300 करोड़ रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर की और किसानों से संवाद किया। उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर लगी प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया, जिसमें कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन और अन्य विभागों द्वारा आधुनिक खेती, ड्रोन तकनीक तथा जैविक खेती जैसी जानकारी प्रदान की जा रही थी। विशेषज्ञों ने किसानों की समस्याओं का समाधान किया। वहीं, मुख्यमंत्री ने ओंकारेश्वर में एक मासूम की मौत पर कड़ा रुख अपनाते हुए विभागीय जांच के आदेश दिए।

मुरैना के कैलारस शक्कर कारखाने की 438 करोड़ की जमीन 60 करोड़ में बिकी

मुरैना के कैलारस स्थित शक्कर कारखाने की 37.887 हेक्टेयर निजी जमीन, जिसका मूल्यांकन जिला पंजीयक व कलेक्टर ने 438.14 करोड़ रुपए किया था, उसे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग (MSME) को 60.92 करोड़ रुपए में बेच दिया गया। विशेषज्ञों और किसान संघ ने पुनर्जीवन का प्रस्ताव दिया था, जिससे एनसीडीसी से 5 हजार करोड़ का ऋण मिल सकता था, 30 हजार रोजगार सृजित होते और 1 लाख किसानों की आय दोगुनी होती। हालांकि, अधिकारियों ने विशेषज्ञ संस्थाओं की सिफारिशों को अनदेखा किया। इस सौदे पर अधिकारियों के तर्क और दस्तावेजों में विरोधाभास सामने आए हैं, जिस पर कई प्रश्न उठाए गए हैं।