नीमच में चार युवकों ने कलेक्टर कार्यालय परिसर में लोट लगाकर सड़क निर्माण की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि कानियाखेड़ी-अंबा माता रोड स्वीकृत होने और चार साल पहले भूमिपूजन होने के बावजूद पीडब्ल्यूडी और वन विभाग की एनओसी के कारण अटका है। इससे ग्रामीणों को कीचड़ भरे रास्ते से गुजरना पड़ रहा है। डिप्टी कलेक्टर चंद्र सिंह धार्वे सहित अन्य अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर युवकों की शिकायत सुनी। युवकों ने एनओसी की समस्या के समाधान और जल्द सड़क निर्माण की मांग करते हुए आवेदन भी दिया।
बालाघाट जिले के लांजी थाना क्षेत्र में पिपरई नाले में बहने से 39 वर्षीय रामदास मेश्राम की मौत हो गई। शुक्रवार को पोला पर्व के दिन वह घर से निकले थे और देर रात तक वापस नहीं लौटे। शनिवार सुबह ग्रामीणों ने उनका शव नाले की पुलिया के पास पाया। लांजी क्षेत्र में हुई भारी बारिश के कारण नाला उफान पर था। कोसमारा के सरपंच दिलीप धनौले ने बताया कि नाले पर बनी पुलिया की ऊंचाई कम है और इसे ऊंचा करने की मांग कई बार विधायक से की जा चुकी है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर जांच शुरू कर दी है।
डिंडौरी जिले के ग्राम जल्दा मुड़िया के ग्रामीणों ने शनिवार सुबह डिंडौरी-मंडला मार्ग पर सड़क डामरीकरण की मांग को लेकर चक्का जाम कर दिया। यह प्रदर्शन लगभग 7 किलोमीटर कच्चे रास्ते को पक्का करने की कई महीनों पुरानी मांग पर ध्यान न दिए जाने के बाद किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने समस्या समाधान के लिए कई बार आवेदन दिए हैं। पक्की सड़क के अभाव में बरसात में स्कूल, सोसायटी और पंचायत भवन तक पहुंचने में दिक्कत होती है, साथ ही गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने में भी परेशानी होती है। पुलिस मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को समझाइश दे रही है।
मध्यप्रदेश के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा के गृह विधानसभा क्षेत्र इछावर के कचनारिया गांव में एक बुजुर्ग व्यक्ति के निधन के बाद ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए उफनती नदी पार कर शव ले जाना पड़ा। गांव में श्मशान घाट तक पुल न होने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। ग्रामीणों ने जान जोखिम में डालकर कंधों पर शव ढोया। करण सिंह वर्मा 35 वर्षों से अधिक समय से विधायक हैं, फिर भी गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। स्थानीय निवासियों में आक्रोश है और वे श्मशान घाट मार्ग पर पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं।
खरगोन के भगवानपुरा विकासखंड स्थित वन ग्राम धरमपुरी का डोंगल्यापानी गांव दशकों बाद भी विकास से वंचित है। यहां ग्रामीण उफनती कुंदा नदी को जान जोखिम में डालकर पार करने को विवश हैं। पुल और सड़क के अभाव में मरीजों व गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने के लिए खटिया या कपड़े की झोली का सहारा लेना पड़ता है। ग्रामीणों को पीपलझोपा पहुंचने के लिए एक ही नदी को पांच बार पार करना पड़ता है। ग्रामीणों ने पुल और सड़क निर्माण के लिए कई बार ज्ञापन दिए हैं, लेकिन स्थिति यथावत है। एसडीओ आरईएस के अनुसार, पुल निर्माण के प्रस्ताव भेजे गए हैं और स्वीकृति मिलते ही काम शुरू होगा।
विदिशा तहसील की ग्राम पंचायत कराखेड़ी में श्मशान घाट के अभाव में ग्रामीणों को अंतिम संस्कार में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में, 80 वर्षीय ग्रामीण रघुवीर दांगी के निधन पर बारिश के दौरान ग्रामीणों को अस्थायी शेड बनाकर अंतिम संस्कार करना पड़ा। श्मशान घाट के लिए प्रस्तावित जमीन पर विवाद के कारण निर्माण कई सालों से अटका हुआ है। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और तहसीलदार व सीईओ ने गांव का दौरा कर जांच के निर्देश दिए। यह समस्या केवल कराखेड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले के 177 गांवों में शांतिधाम नहीं हैं, जबकि 237 गांवों में वे जर्जर हालत में हैं।
सीहोर जिले के आष्टा विधानसभा क्षेत्र में स्थित ग्राम पंचायत जीवापुर महोडिया के ग्रामीण सड़क न होने से परेशान हैं। आजादी के 75 साल बाद भी गांव में कोई विकास योजना नहीं पहुंची है। ग्रामीणों और किसानों ने प्रशासनिक अधिकारियों व राजनेताओं से जल्द सड़क बनाने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सड़क नहीं बनी तो वे जावर तहसील के सामने धरना प्रदर्शन करेंगे और आगामी चुनाव में वोट का बहिष्कार करेंगे। पूर्व नपा अध्यक्ष शैलेष कुमार वैद्य ने गांव का दौरा कर समस्या पर दुख व्यक्त किया और प्रशासन से ध्यान देने का आग्रह किया।
मध्य प्रदेश के मैहर जिले से एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है, जहां ग्राम पंचायत सोनवारी के मोदीनगर और आदिवासी बस्ती के स्कूली बच्चे उफनते नाले को पार कर जान जोखिम में डालकर स्कूल जाते हैं। ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं का अभाव है और बारिश में नाला पार करना उनकी मजबूरी है। सरपंच कृष्णाबाई उमाकांत उपाध्याय ने 2024 और 2025 में जिला प्रशासन को मांग पत्र सौंपे, जबकि ग्रामीणों ने चार साल से ग्राम पंचायत, जिला प्रशासन और सीमेंट कंपनी के सीएसआर विभाग को रपटा व सड़क निर्माण के लिए कई ज्ञापन दिए हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मैहर कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी से संपर्क नहीं हो सका।
धार जिले में लोहारीखुर्द-आहू-धार मुख्य मार्ग पर 366.39 लाख रुपये की लागत से हो रहे ब्रिज निर्माण कार्य में देरी से आठ से अधिक गांवों के ग्रामीण परेशान हैं। निर्माण के कारण मुख्य मार्ग बाधित हो गया है। आवाजाही के लिए बनाया गया अस्थायी मार्ग वर्षा में बह जाने से रास्ता पूरी तरह बंद है। ग्रामीणों ने कार्य की धीमी गति और गुणवत्ता में लापरवाही का आरोप लगाया है। मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के महाप्रबंधक शौर्यप्रताप सिंह ने गुणवत्ताहीन सामग्री के उपयोग से इनकार करते हुए जांच का आश्वासन दिया है।
विदिशा के ग्राम पलोह में स्कूली बच्चे बेतवा नदी के स्टाप डैम को पार कर जान जोखिम में डाल स्कूल जा रहे हैं। इसका एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुआ है। यह रास्ता सड़क मार्ग से पांच किलोमीटर दूर होने के बजाय एक किलोमीटर से कम पड़ता है, जिससे बच्चे लंबा चक्कर बचाने के लिए इसे अपनाते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बारिश में यह रास्ता खतरनाक हो जाता है और शहर से संपर्क टूट जाता है। सरपंच अमरसिंह ठाकुर ने पिछले साल भी ऐसे ही एक वीडियो के बाद बच्चों को इस रास्ते से बचने की सलाह दिए जाने की जानकारी दी।