उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने ओबीसी प्रमाणपत्र से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि क्रीमीलेयर का निर्धारण केवल माता-पिता के वेतन के आधार पर नहीं किया जा सकता, बल्कि उनकी सेवा स्थिति, पद की श्रेणी, पदोन्नति की तारीख और आय के स्वरूप सहित अन्य निर्धारित मापदंडों की जांच भी आवश्यक है। आवेदिका रागिनी राठौर के मामले में, न्यायालय ने पूर्व में पारित दो आदेश रद्द कर दिए और प्रकरण को नए सिरे से निर्णय के लिए सक्षम अधिकारी के पास भेज दिया है। सक्षम अधिकारी को छह सप्ताह में कारणयुक्त आदेश पारित करने का निर्देश दिया गया है।
ग्वालियर हाई कोर्ट की खंडपीठ ने पीएचई कर्मचारी गोपाल सिंह को सातवें वेतन आयोग का लाभ एक जनवरी 2016 से देने के पूर्व आदेश में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति आनंद सिंह बहरावत की एकलपीठ ने कहा कि आदेश में कोई प्रत्यक्ष त्रुटि नहीं है। सरकार ने आठ अगस्त 2022 के परिपत्र का हवाला देते हुए लाभ 15 दिसंबर 2016 से देने की दलील दी थी, जिसे अदालत ने समान मामलों में पूर्व निर्णयों के आधार पर निराधार माना।