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त्विषा शर्मा मौत मामला: रिटायर्ड जज गिरिबाला और बेटे समर्थ पर उसी अदालत में चलेगा केस जिसने दी थी अग्रिम जमानत

भोपाल के चर्चित त्विषा शर्मा मौत मामले में आरोपी पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जिला एवं सत्र प्रधान न्यायाधीश मनोज कुमार श्रीवास्तव ने मामले को अपर सत्र न्यायाधीश पल्लवी द्विवेदी की अदालत में स्थानांतरित कर दिया है। इसी अदालत से गिरिबाला सिंह को पहले अग्रिम जमानत मिली थी, जिसे हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था। सीबीआई ने 17 अगस्त को दोनों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप पत्र दाखिल किया है। 16 सितंबर 2026 को आरोप तय करने पर सुनवाई होगी। परिजनों ने निष्पक्ष सुनवाई के लिए केस को अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग की है।

चावल हेराफेरी कांड: सिवनी की राइस मिल में डेढ़ हजार से अधिक खाली बोरे जब्त

बहुचर्चित सरकारी चावल हेराफेरी कांड में एसआईटी ने सिवनी स्थित नंदगोपाल राइस मिल पर छापा मारा, जहां डेढ़ हजार से अधिक खाली बोरे जब्त किए गए। यह कार्रवाई आरोपित राइस मिल संचालक सोनू जैन को सिवनी ले जाने के बाद की गई। सोनू जैन पंजाब के निवासी हैं और सिवनी में उनकी दो राइस मिलें हैं। एसआईटी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों में जांच कर रही है, जिसमें अब तक 13 आरोपित गिरफ्तार हुए हैं और चार फरार हैं। आरोपितों ने उच्च न्यायालय में जमानत याचिकाएं दायर की हैं, जिनमें से कुछ पर सुनवाई बाकी है।

सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द की, आत्मसमर्पण का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने हनीमून के दौरान पति की हत्या की आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द कर दी है। कोर्ट ने उन्हें तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने कहा कि निचली अदालतों ने गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी में कथित कमी के आधार पर जमानत देते समय गलती की थी। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि अगर छह महीने में मुकदमे की सुनवाई पूरी नहीं होती है, तो सोनम नई जमानत याचिका दाखिल कर सकती हैं। मेघालय सरकार ने जमानत के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत पर सुनवाई से दो न्यायाधीश हटे

पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह ने मॉडल त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में जमानत मांगी है। मंगलवार को इस याचिका पर सुनवाई होनी थी, लेकिन दो न्यायाधीशों ने पारिवारिक संबंधों का हवाला देते हुए खुद को इससे अलग कर लिया। मामला तीसरे न्यायालय को भेजा गया, जहां नियमित मजिस्ट्रेट के अवकाश पर होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। गिरिबाला सिंह ने स्वास्थ्य और पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए अपनी 100 वर्षीय मां की देखभाल और घर की चोरी के बाद संपत्ति की देखरेख के लिए जेल से बाहर रहने की आवश्यकता बताई है।