मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत पानी की गुणवत्ता जांच में गंभीर कमियां सामने आई हैं। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की सभी 155 जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं में रासायनिक विषाक्तता जांच की सुविधा नहीं है। केवल एक राज्य-स्तरीय प्रयोगशाला में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) का परीक्षण संभव है। कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने राज्यसभा में यह मुद्दा उठाया, जिसके बाद उन्होंने राज्य सरकार से विस्तृत जांच की मांग की है। प्रदेश के 77.21% घरों में नल कनेक्शन हैं, लेकिन 23 जिलों में पेयजल आपूर्ति कवरेज 70% से कम है।
मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत 77.21 प्रतिशत परिवारों तक नल जल पहुंचने का दावा किया गया है। हालांकि, जिला स्तरीय आंकड़े इससे अलग तस्वीर दर्शाते हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर में लगभग 43 प्रतिशत और विदिशा में लगभग 33 प्रतिशत परिवारों तक अब भी नल का पानी नहीं पहुंचा है। प्रदेश के 8 जिलों, जिनमें सतना, छतरपुर और सिंगरौली शामिल हैं, में आधे से अधिक परिवार नल जल सुविधा से वंचित हैं। कुल 23 जिलों में नल जल कवरेज 70 प्रतिशत से कम है। लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अनुसार, कम कवरेज का कारण बहु-ग्राम जल योजनाओं का निर्माणधीन होना है।
मध्य प्रदेश सरकार ने युवाओं और आमजनों की समस्याओं के त्वरित निदान हेतु ‘मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान’ की शुरुआत की घोषणा की है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कैबिनेट बैठक में बताया कि यह अभियान हर शुक्रवार को चलेगा, जिसमें मुख्यमंत्री, मंत्री, कलेक्टर और अन्य मैदानी अधिकारी फील्ड में जाकर सीधे लोगों की समस्याओं को सुनेंगे और उनका समाधान करेंगे। अभियान का उद्देश्य सरकार की योजनाओं की सीधी मॉनिटरिंग और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है। यह अभियान सात अगस्त से शुरू होकर अगले साल 8 जनवरी तक चलेगा, जिसमें 20 प्रमुख विषयों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।