ग्वालियर के हजार बिस्तर अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के दौरान एक 60 वर्षीय मरीज रतीराम की इलाज के अभाव में मौत हो गई। डॉक्टरों ने मंगलवार रात उन पर हुए हमले के बाद सुरक्षा की मांग पर काम बंद कर दिया था। दतिया से आए रतीराम को पर्चा बनने और प्रारंभिक जांचों के बावजूद भर्ती नहीं किया गया, और उन्होंने अस्पताल के फर्श पर दम तोड़ दिया। अस्पताल अधीक्षक डॉ. सुधीर सक्सेना ने मरीज की मौत की सूचना न मिलने की बात कही है।
शिवपुरी निवासी 40 वर्षीय अमित को जेएएच न्यूरोलॉजी अस्पताल, ग्वालियर में दुर्लभ ‘मोयामोया’ बीमारी का पता चला है। वे लगभग तीन दशकों से रुक-रुक कर होने वाली न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से जूझ रहे थे, जिसकी शुरुआत 10 वर्ष की आयु में दाहिने हिस्से में कमजोरी से हुई थी। हाल ही में बेहोशी की स्थिति के बाद उन्हें अस्पताल लाया गया, जहां जांच में इस दुर्लभ मस्तिष्क रक्त वाहिका संबंधित बीमारी की पहचान हुई। गंभीर स्थिति में वेंटिलेटर पर रखे गए अमित को बाद में सफलतापूर्वक हटा दिया गया। परिवार द्वारा सर्जरी से इनकार करने पर, डॉ. दिनेश उदैनिया, डॉ. अरविंद गुप्ता और डॉ.
ग्वालियर के जयाआरोग्य अस्पताल समूह (जेएएच) और गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय (जीआरएमसी) के लिए 1000 करोड़ रुपये का मास्टर प्लान सैद्धांतिक रूप से स्वीकृत हो गया है। मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने इस योजना को मंजूरी दी है। यह परियोजना ग्वालियर को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, मेडिकल शिक्षा, सुपर स्पेशियलिटी उपचार और शोध का केंद्र बनाएगी। दिल्ली के विशेषज्ञ और बीडीसी की टीम द्वारा तैयार इस प्लान में नए भवनों के निर्माण, पुराने भवनों के जीर्णोद्धार और आधुनिक सुविधाओं का विकास शामिल है। इससे हजारों मरीजों और मेडिकल छात्रों को लाभ मिलेगा।