ग्वालियर का ट्रांसपोर्ट नगर, शहर की औद्योगिक और व्यापारिक रीढ़, बदहाली और मानसून में जलभराव तथा जर्जर सड़कों के गंभीर संकट से जूझ रहा है। बीते एक साल में कई बार सुर्खियों में रहने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं मिला है। इससे रोजाना 500-600 ट्रक और 1000 छोटे मालवाहक वाहनों का आवागमन प्रभावित होता है, दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है और लाखों के सामान का नुकसान हो सकता है। लगभग 3000 लोग प्रभावित होते हैं। पूर्व कमिश्नर के निरीक्षण के बाद शुरू हुआ नाली सफाई का काम उनके तबादले के बाद रुक गया। मुख्य सड़क का निर्माण भी एक साल से अधूरा है, जिससे व्यापार पर बुरा असर पड़ रहा है।
ग्वालियर में दो-तीन दिनों की वर्षा से शहर की सड़कें बदहाल हो गई हैं, जिससे नगर निगम के समय पर निर्माण और पैच रिपेयरिंग में लापरवाही उजागर हुई है। करोड़ों की लागत से बनी ट्रांसपोर्ट नगर की सड़कों में भी जलभराव और बड़े गड्ढे हैं, जिससे व्यापारी और ट्रांसपोर्टर परेशान हैं। कारोबारियों ने सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं, जबकि ठेकेदार राबिन सक्सेना ने 90 प्रतिशत काम पूरा होने का दावा किया है और गिट्टी निकलने की बात से इनकार किया है। झांसी रोड के धंसने के बावजूद अधिकारियों ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया। शिंदे की छावनी और सिटी सेंटर जैसे क्षेत्रों में भी सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हैं।