जबलपुर में एक युवक को ऑनलाइन होटल रेटिंग के नाम पर घर बैठे कमाई का झांसा देकर साइबर ठगों ने 37 लाख 423 रुपये ठग लिए। ठगों ने शुरुआत में छोटे टारगेट पूरे करने पर मुनाफा देकर युवक का भरोसा जीता, फिर रिचार्ज और अधिक मुनाफे के नाम पर उससे लगातार पैसे जमा करवाए। युवक ने अपने, पत्नी और परिचितों के खातों से लाखों रुपये ट्रांसफर किए। पैसे ऐंठने के बाद ठगों ने संपर्क तोड़ दिया और उसे ब्लॉक कर दिया। अधारताल पुलिस ने अज्ञात आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
भोपाल में एमपी नगर पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है जो खुद को आईपीएस अधिकारी बताकर बेरोजगार युवाओं से सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये ठगता था। आरोपी की पहचान झांसी निवासी ऋषि कुमार यादव के रूप में हुई है, जो 2016 बैच का आईपीएस अधिकारी होने का दावा करता था। पुलिस ने उसके पास से फर्जी आईपीएस पहचान पत्र, नकली दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। पीड़ित युवाओं को जॉइनिंग लेटर में स्पेलिंग की गलतियों से ठगी का पता चला, जिसके बाद उन्होंने शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब अन्य शहरों में भी ठगी के मामलों की जांच कर रही है।
मध्य प्रदेश में हाल ही में पांच फर्जी अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है, जिन्होंने लाखों रुपये की ठगी की। इनमें तृप्ति सिंह राजपूत ने खुद को आईएएस और MPSTDC की एडिशनल डायरेक्टर बताया, वहीं आठवीं पास विकास गौतम ने सोशल मीडिया पर खुद को आईपीएस अधिकारी दर्शाया। एम.टेक पासआउट ऋषि कुमार यादव ने गलत स्पेलिंग वाले नियुक्ति पत्र के कारण पोल खुलने पर गिरफ्तारी हुई। हिमांशु पांचाल ने ‘आईएएस राज सोनी’ बनकर इंदौर के होटलों और ड्राइवरों को निशाना बनाया। दिल्ली निवासी अतुल कुमार ने खुद को नागरिक उड्डयन मंत्रालय का संयुक्त सचिव बताकर उज्जैन के महाकाल मंदिर में वीआईपी सुविधा का दबाव बनाया।
भोपाल के कोतवाली थाना क्षेत्र में 62 वर्षीय अशरफी बाई से ठगी का मामला सामने आया है। नरसिंहगढ़ से इलाज कराने आई अशरफी बाई को दो जालसाजों ने 500 रुपये के असली नोट दिखाकर विश्वास में लिया। उन्होंने महिला को डरा-धमाकर सोने के मंगलसूत्र और कान के टाप्स उतरवा लिए। जालसाजों ने असली नोटों की गड्डी का लालच देकर अंततः महिला को रद्दी कागजों की पोटली थमा दी। अपनी बेटी के घर पहुंचने पर महिला को ठगी का पता चला, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर सीसीटीवी फुटेज खंगालकर आरोपितों की तलाश शुरू कर दी है।
ग्वालियर में 1.63 करोड़ रुपये की निवेश ठगी के मामले में क्राइम ब्रांच ने मेरठ से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों ने अपनी फर्जी फर्म ‘जुबेर टेलीकॉम मेरठ’ का बैंक खाता साइबर ठगों को 5 हजार रुपये प्रतिदिन के किराए पर उपलब्ध कराया था। इस खाते में ग्वालियर की ठगी के 11 लाख रुपये सहित सात राज्यों में हुई साइबर ठगी का पैसा भी पहुंचा था। पुलिस ने इसे ‘म्यूल बैंक खाता’ माना है। जांच में बिलाल सैफी का ‘साधू’ नामक व्यक्ति से व्हाट्सएप संपर्क और दिल्ली में मुलाकात का खुलासा हुआ है। पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों और कथित मास्टरमाइंड ‘साधू’ की तलाश कर रही है।
राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) के एक प्यून नसीम खान ने 15 लोगों से नौकरी लगवाने के नाम पर लगभग 18 लाख रुपये की ठगी की है। आरोपी ने आरजीपीवी में क्लर्क की नौकरी का झांसा दिया और फर्जी नोटिस भी दिखाए। बाद में उसने ठगी की रकम अपने मुंह के कैंसर के इलाज में खर्च कर दी, जो चौथी स्टेज में है। गांधीनगर पुलिस ने मामला दर्ज किया है, लेकिन आरोपी का इलाज चलने के कारण अभी गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस मामले में लेनदेन और फर्जी दस्तावेजों की जांच कर रही है।
ग्वालियर शहर में साइबर ठगी की पांच घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें एक वायुसेनाकर्मी सहित पांच लोग शिकार हुए हैं। महाराजपुरा एयरफोर्स स्टेशन में पदस्थ सुनील बंसल ने ‘वेलकम बोनस’ के झांसे में आकर एक लिंक पर क्लिक किया, जिसके बाद उनके खाते से 2.26 लाख रुपये निकल गए। अन्य घटनाओं में अरविंद श्रीवास ने 32,214 रुपये, देवकुमार गुप्ता ने लगभग 67 हजार रुपये, माताप्रसाद राठौर ने 1.18 लाख रुपये और अनवर कुरैशी ने 40 हजार रुपये गंवाए हैं। ये सभी घटनाएं शहर के महाराजपुरा और मुरार क्षेत्रों से संबंधित हैं।
भोपाल के अशोका गार्डन क्षेत्र में एक सेवानिवृत्त निगम कर्मचारी जुगल किशोर श्रीवास्तव से साइबर ठग ने 78 हजार रुपये की ठगी की है। ठग ने 18 जुलाई को फोन कर खुद को शर्मा बताया और कहा कि उसके मामा को हृदय रोग है तथा वे अस्पताल में भर्ती हैं, जिसके इलाज के लिए तत्काल पैसों की आवश्यकता है। भरोसे में आए श्रीवास्तव ने पहले डॉक्टर के बताए यूपीआई पर 25 हजार, 20 हजार और 23 हजार रुपये भेजे, फिर ठग के अपने यूपीआई पर 10 हजार रुपये ट्रांसफर किए। पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है।
म्यूल खातों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के बाद साइबर अपराधियों ने ठगी का नया तरीका अपनाया है। अब वे ‘हैंडलर’ तैनात कर रहे हैं, जो तकनीकी रूप से दक्ष युवा और बीई-बीटेक इंजीनियर होते हैं। ये हैंडलर दूर-दराज के राज्यों से ठगी नेटवर्क और बैंक खाते संचालित करते हैं। हाल ही में 21.05 करोड़ रुपये की चार्टर्ड अकाउंटेंट से ठगी के मामले में हैंडलर अंकित वर्मा को गिरफ्तार किया गया। हैंडलर एपीके फाइल के जरिए ओटीपी प्राप्त कर स्क्रीन शेयरिंग से काम करते हैं और ठगी का पैसा तुरंत कई खातों में ट्रांसफर कर देते हैं, जिससे पुलिस को उलझाना आसान हो जाता है। खाताधारक को केवल एटीएम से अपना कमीशन निकालना होता है।
अशोकनगर में बीजेपी मंडल अध्यक्ष प्रांजल जैन की मां अनंत देवी जैन से करीब सात लाख रुपये के सोने के आभूषण और नगदी की ठगी हुई है। शनिवार सुबह मंदिर से लौटते समय दो अज्ञात युवकों ने उन्हें ‘बेटे पर संकट’ का डर दिखाकर बातों में उलझाया। ठगों ने पूजा के बहाने महिला को स्टेशन रोड ले जाकर आभूषण उतरवा लिए और 51 कदम आगे-पीछे जाने की बात कहकर फरार हो गए। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है, हालांकि घर के बाहर के कैमरे बंद मिले।