ग्वालियर में आयोजित क्षेत्रीय न्यायिक सम्मेलन में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा ने डीपफेक तकनीक और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वास्तविक और कृत्रिम साक्ष्य के बीच अंतर करना न्यायपालिका के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। न्यायमूर्ति मिश्रा ने न्यायिक अधिकारियों से बदलते समाज और तकनीक के अनुरूप अपनी सोच और कानूनों की व्याख्या का विस्तार करने का आग्रह किया। उन्होंने जोर दिया कि न्यायदान केवल कानूनी धाराओं तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों की वास्तविक परिस्थितियों को समझना भी महत्वपूर्ण है।
भारतीय खुफिया एजेंसियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने वाले डीपफेक वीडियो में अचानक वृद्धि का दावा किया है। एजेंसियों के अनुसार, ये वीडियो युवाओं, खासकर छात्रों को दोबारा विरोध-प्रदर्शन के लिए उकसाने और राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के उद्देश्य से कथित तौर पर पाकिस्तान से संचालित सोशल मीडिया हैंडल द्वारा प्रसारित किए जा रहे हैं। इन वीडियो में दावा किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री हालिया छात्र प्रदर्शनों में शामिल युवाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई चाहते हैं, जबकि सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी।