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विदेशों में भी धूमधाम से मनाया जा रहा गणेशोत्सव, स्थानीय लोग भी हो रहे शामिल

इंदौर की गलियों में गणेशोत्सव का माहौल विदेशों में बसे इंदौरियों को आज भी याद आता है, जिसके चलते वे हजारों किलोमीटर दूर भी बप्पा का स्वागत उसी श्रद्धा से कर रहे हैं। ब्राजील, दुबई और अमेरिका जैसे देशों में गणेशोत्सव का स्वरूप परिस्थितियों के अनुसार बदला है, लेकिन उत्साह बरकरार है। स्थानीय लोग भी भारतीय परिवारों के साथ पूजा-आरती में शामिल होकर भारतीय परंपराओं को समझ रहे हैं। दुबई के सुपरमार्केट में विशेष काउंटर और रेडमंड में 20 हजार भारतीय-अमेरिकियों की भागीदारी जैसे उदाहरण इस वैश्विक उत्सव को दर्शाते हैं।

ग्वालियर किले पर गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ में तीन दिवसीय उत्सव प्रारंभ

ग्वालियर किले पर स्थित गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ में गुरुवार को तीन दिवसीय उत्सव अखंड पाठ के साथ प्रारंभ हुआ। इस दौरान सचखंड साहिब अमृतसर के हजूरी रागी और कथा वाचकों ने संगत को निहाल किया। अमृतसर से लगभग 800 किलोमीटर की दूरी तय कर बुधवार को जलालपुर पहुंची शबद चौकी कीर्तन यात्रा गुरुवार सुबह फूलबाग गुरुद्वारा होते हुए दाता बंदी छोड़ गुरुद्वारा पहुंची। सिख संगत और श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया। शुक्रवार को यात्रा दुर्ग के परकोटे और किले की बाहरी परिक्रमा करेगी, जबकि शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या पर भी परिक्रमा का आयोजन होगा।

उज्जैन के बड़े गणेश मंदिर में हिंदू पंचांग से मनाया गया स्वतंत्रता दिवस

उज्जैन के प्रसिद्ध बड़े गणेश मंदिर में स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त से चार दिन पहले, 11 अगस्त को श्रावण कृष्ण चतुर्दशी तिथि पर मनाया गया। यह मंदिर अंग्रेजी कैलेंडर की बजाय हिंदू पंचांग के अनुसार आजादी का जश्न मनाने की प्राचीन परंपरा का पालन करता है। 1947 में देश की आजादी भी श्रावण कृष्ण चतुर्दशी को हुई थी, जिसके मुहूर्त का निर्धारण उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित सूर्य नारायण व्यास ने तत्कालीन राष्ट्रीय नेतृत्व, विशेषकर डॉ. राजेंद्र प्रसाद के परामर्श पर किया था। यह परंपरा 79 वर्षों से व्यास परिवार द्वारा निजी और धार्मिक स्तर पर आयोजित की जा रही है, जिसमें अब हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।

श्रीधूनीवाले दादाजी समाधि पर मंगलवार रात 12 बजे से निशान, फूल, चादर चढ़ाने पर प्रतिबंध

खंडवा में तीन दिवसीय गुरु पूर्णिमा उत्सव मंगलवार से शुरू होगा, जिसका मुख्य दिवस 29 जुलाई है। उत्सव के मद्देनज़र, मंगलवार रात 12 बजे से श्रीधूनीवाले दादाजी की समाधि पर निशान, फूल और चादर चढ़ाने पर प्रतिबंध रहेगा, निशान गेट नंबर एक पर लिए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को समाधि दर्शन किए। शहर में भंडारों के लिए स्टाल सज गए हैं, और महापौर ने सिंगल यूज प्लास्टिक के बजाय पलाश के पत्तों से बने दोने-पत्तल वितरित किए हैं। धूनीमाई का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो गया है, जिसके लिए विशेष व्यवस्था की गई है।