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महाकाल के भोग के लिए आज भी मांगी जाती है भिक्षा

उज्जैन के महाकाल मंदिर में भस्म आरती से जुड़ी कई अनूठी परंपराएं हैं। भगवान महाकाल के भोग के लिए एक दिन पहले भिक्षा मांगने की सदियों पुरानी परंपरा आज भी निभाई जाती है, जिसमें पुजारी परिवार द्वारा नियुक्त व्यक्ति शहर की 20 से अधिक दुकानों से सामग्री एकत्र करता है। भस्म आरती के लिए 16 अधिकृत पुजारी ही होते हैं। आरती से पूर्व मंदिर के पट आज्ञा लेकर खुलते हैं, 16 मंत्रों से अभिषेक होता है और नंदी के अभिषेक के बाद भगवान का भव्य शृंगार होता है। भस्म अर्पण के समय महिलाएं घूंघट रखती हैं। सावन में सोमवार को भगवान उपवास भी रखते हैं, और चढ़ाए गए फूलों से अगरबत्ती बनती है।

उज्जैन के बड़े गणेश मंदिर में 11 अगस्त को मनाया जाएगा स्वतंत्रता दिवस

उज्जैन के बड़े गणेश मंदिर में स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त के बजाय 11 अगस्त को मनाया जाएगा। मंदिर की अनूठी परंपरा के तहत राष्ट्रीय पर्व अंग्रेजी कैलेंडर की बजाय वैदिक तिथि के अनुसार मनाए जाते हैं। ज्योतिषाचार्य पं. अक्षय व्यास के अनुसार, भारत को 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली थी, जो श्रावण कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी थी। इस वर्ष यह तिथि 11 अगस्त को पड़ रही है। मंदिर में गणतंत्र के आराध्य देव बड़े गणेश का अभिषेक-पूजन, ध्वजारोहण, राष्ट्रगान और भारत माता का पूजन किया जाएगा। यह परंपरा भारतीय संस्कृति और स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान में निभाई जाती है।