उच्च न्यायालय ने दमोह के गंगा-जमुना हायर सेकेंडरी स्कूल में छात्राओं से कथित तौर पर अनिवार्य हिजाब और धार्मिक प्रथाएं लागू कराने के मामले में दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) निरस्त करने से इन्कार कर दिया है। न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने स्कूल के पूर्व पदाधिकारी शैलेन्द्र कुमार जैन, अब्दुल वसीम बारी, शिक्षक अनास अतहर और चपरासी रुस्तम अली की याचिकाएं खारिज कर दीं। न्यायालय ने कहा कि प्राथमिकी के आरोप पहली नजर में निराधार नहीं कहे जा सकते। हिंदू छात्राओं को हिजाब में दिखाए जाने वाले पोस्टर के बाद जांच शुरू हुई थी और पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत आरोपपत्र दाखिल किया है।
बैतूल के सदर क्षेत्र स्थित मिशन प्राथमिक शाला में मतांतरण के प्रयास की सूचना पर कोतवाली पुलिस ने जांच शुरू की है। ग्राम दनोरा निवासी सत्यम विश्वकर्मा की शिकायत पर कृष्ण कुमार शेषकर एवं अन्य के खिलाफ बीएनएस 2023 और मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021 की धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि उन्हें पैर दर्द के इलाज के बहाने ईसाई धर्म अपनाने और नौकरी व पैसे का प्रलोभन दिया गया। हिंदू संगठनों ने इस घटना का विरोध करते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। पुलिस मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।