ब्यावरा की अजनार नदी की सफाई को लेकर एक विवाद सामने आया है। छात्र सुरेंद्र सिंह चौधरी उर्फ ‘बिट्टू तबाही’ ने छह महीने में अकेले नदी साफ करने का दावा किया है, जिसकी रील इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो रही है। हालांकि, स्थानीय लोग और प्रशासन के अधिकारी इस दावे को फर्जी बता रहे हैं। उनका कहना है कि नदी में अभी भी गंदगी बरकरार है और केवल सरकार के प्रयासों से ही इसकी सफाई संभव है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए 14.77 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं।
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी से कर्वी नगर को पेयजल आपूर्ति होती है, लेकिन इंटेकवेल से 50 मीटर दूर एक सड़ा हुआ कुत्ता मिलने से नदी में गंदगी और सीवर के पानी के आरोपों ने पेयजल की शुद्धता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके विरोध में सत्याग्रही अभिमन्यु सिंह ने साथियों के साथ जल सत्याग्रह और आमरण अनशन शुरू किया। प्रशासन के आश्वासन पर सत्याग्रह समाप्त हो गया। एसडीएम सदर अजय कुमार ने आंदोलनकारियों से वार्ता के बाद समयबद्ध कार्रवाई का भरोसा दिया है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने स्वर्णरेखा नदी के प्रदूषण और पुनर्जीवन पर दायर जनहित याचिका पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने नगर निगम और राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर नदी के प्रदूषण को रोकने के लिए उठाए गए कदमों, भविष्य की योजनाओं और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) की प्रगति पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति जी.एस. अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने नगर निगम से नदी में कचरा डालने वाले स्रोतों और धरातल पर की गई कार्रवाई के बारे में भी पूछा है। मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त 2026 को होगी।