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हरियाली अमावस्या पर 12 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण, भारत में नहीं दिखेगा असर

श्रावण मास की हरियाली अमावस्या पर 12 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण लगेगा। यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, जिसके कारण सूतक काल मान्य नहीं होगा और धार्मिक अनुष्ठान सामान्य रूप से किए जा सकेंगे। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा के अनुसार, हरियाली अमावस्या प्रकृति, पर्यावरण और धार्मिक आस्था से जुड़ा पर्व है। इस दिन भगवान शिव की पूजा, तर्पण और पौधारोपण का विशेष महत्व है। ग्रहण भारतीय समयानुसार रात 9 बजकर 4 मिनट से शुरू होकर देर रात 1 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। अगस्त माह में 28 अगस्त को आंशिक चंद्र ग्रहण भी होगा, जो भारत में अदृश्य रहेगा।

लालघाटी गुफा मंदिर सावन सोमवार के लिए तैयार, विशेष अभिषेक और पूजन कार्यक्रम होंगे आयोजित

भोपाल के लालघाटी स्थित प्रसिद्ध गुफा मंदिर सावन सोमवार के लिए पूरी तरह तैयार है। प्राकृतिक कंदरा में विराजमान स्वयंभू शिवलिंग का यह पावन धाम मध्य भारत के भक्तों की श्रद्धा का केंद्र है। मंदिर के पंडित लेखराज शर्मा के अनुसार, महंत नारायणदास त्यागी महाराज ने 1949 में इस गुप्त कंदरा की खोज की थी और 1965 में इसका पुनर्निर्माण कर जन-साधारण के लिए खोला गया। सावन सोमवार पर अलसुबह विशेष जलाभिषेक, श्रृंगार, आरती और महामृत्युंजय जाप के बाद मंदिर के कपाट खुलेंगे। शाम को भी विशेष अभिषेक और महाआरती होगी। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए दर्शन, सुरक्षा, पेयजल और महाप्रसाद के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

केवड़ेश्वर महाकाल शिव मंदिर: 12-13वीं सदी में शिप्रा कुंडों के पास स्थापित

इंदौर तहसील के तिल्लौर खुर्द ग्राम के समीप स्थित प्राचीन केवड़ेश्वर महाकाल शिव मंदिर लगभग 800 वर्ष पुराना है और इसे 12-13वीं सदी का माना जाता है। यह मंदिर शिप्रा नदी के उद्गम स्थल के समीप तीन कुंडों के उत्तर-पूर्वाभिमुख स्थित है। इसका शिवलिंग स्वयंभू है और होलकर राजाओं ने इसका जीर्णोद्धार करवाया था, जबकि संरचना परमार कालीन है। बाबा दूधाधारी महाराज की तपोस्थली के रूप में विख्यात यह स्थल आध्यात्मिक महत्व रखता है। समीप ही कंपेल और देवगुराड़िया जैसे ऐतिहासिक स्थल भी हैं।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग महादेव मंदिर सुगंधित फूलों से भव्य रूप से सजाया गया

श्रावण मास के दूसरे सोमवार पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग नगरी में आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग महादेव के मंदिर को गर्भगृह से लेकर पूरे परिसर तक कई क्विंटल सुगंधित फूलों से भव्य रूप से सजाया गया। यह विशेष पुष्प शृंगार पूरी रात चला, जिसमें महेश्वर और उज्जैन के पंडितों और दक्ष कारीगरों ने सहयोग दिया। सोमवार सुबह मंदिर के पट खुलने पर श्रद्धालुओं ने भोलेनाथ के अलौकिक और मनोहारी स्वरूप के दर्शन कर भावविभोर हो उठे।

महाकाल मंदिर में शनिवार को भस्म आरती संपन्न, गर्भगृह जयकारों से गूंजा

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के परंपरानुसार भस्म आरती संपन्न हुई। सुबह 4 बजे पट खुलने के बाद पंडे-पुजारियों ने देवी-देवताओं का पूजन किया। भगवान महाकाल का पंचामृत से अभिषेक कर उन्हें रजत ॐ, बिल्वपत्र मुकुट और रुद्राक्ष की माला सहित आकर्षक श्रृंगार से सजाया गया। फल और मिष्ठान का भोग लगाने के बाद कपूर आरती हुई और महा निर्वाणी अखाड़े द्वारा भस्म अर्पित की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया और मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा।

श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती: बाबा महाकाल का राजा स्वरूप दिव्य श्रृंगार

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार तड़के भस्म आरती का आयोजन किया गया। इस दौरान वीरभद्र जी को प्रणाम कर और स्वस्ति वाचन के साथ गर्भगृह के पट खोले गए। पुजारियों ने भगवान का पंचामृत से विधि-विधानपूर्वक पूजन किया। कर्पूर आरती के पश्चात बाबा महाकाल को भांग, चंदन, सिंदूर और आभूषणों से राजा स्वरूप में अलौकिक रूप से शृंगारित किया गया। उन्हें रजत मुकुट, रजत मुंडमाल और रुद्राक्ष की माला धारण कराई गई। महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित की गई, जिसके बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

श्रावण के पहले सोमवार को बाबा महाकाल और ओंकारेश्वर-ममलेश्वर की सवारी निकलेगी

श्रावण के पहले सोमवार को उज्जैन में बाबा महाकाल और ओंकारेश्वर में भगवान ओंकारेश्वर-ममलेश्वर की भव्य सवारी निकलेगी। लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है, जिसके लिए प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और अन्य व्यापक इंतजाम किए हैं। महाकाल की सवारी की थीम ‘वैदिक उद्घोष’ होगी, जिसमें वैदिक मंत्रोच्चार गूंजेंगे। वहीं, ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी में दिव्य नौका विहार आकर्षण का केंद्र रहेगा। दोनों तीर्थ स्थल धार्मिक अनुष्ठानों और आयोजनों से शिवमय वातावरण में डूबे रहेंगे।

उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती में दिव्य श्रृंगार

उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में रविवार तड़के भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का विधि-विधान से पूजन और दिव्य श्रृंगार किया गया। सुबह 4 बजे मंदिर के पट खुलने के बाद पंचामृत अभिषेक हुआ। भगवान महाकाल का त्रिशूल, त्रिपुंड और डमरू के साथ भांग से विशेष श्रृंगार किया गया। महा निर्वाणी अखाड़े ने भस्म अर्पित की, जिसके बाद रजत मुकुट, मुंडमाला और पुष्पों की मालाएं चढ़ाई गईं। बड़ी संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शनार्थ पहुंचे।

श्रावण-भादौ मास में भोपाल में निकलेंगी मुक्तेश्वर महादेव की पांच सवारियां

भोपाल में श्रावण-भादौ मास के दौरान बाबा मुक्तेश्वर की पांच सवारियां निकाली जाएंगी, जो उज्जैन के महाकाल की सवारियों के समान होंगी। श्रावण मास 30 जुलाई से शुरू होगा और पहला सोमवार 3 अगस्त को पड़ेगा। इन पांच सवारियों में से चार श्रावण मास में तथा एक भादौ मास के सोमवार को निकलेगी। इस अवधि में प्रतिदिन मुक्तेश्वर महादेव की भस्म आरती भी की जाएगी। उज्जैन में महाकाल की 6 सवारियां निकलती हैं, जबकि भोपाल के मंदिरों में श्रावण की तैयारियां जोरों पर हैं।