खंडवा जिले में 14 जुलाई से 31 अगस्त तक चल रहे दस्तक अभियान के तहत शून्य से पांच वर्ष के बच्चों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है। अब तक 35,388 बच्चों की स्क्रीनिंग हुई है, जिसमें 183 कुपोषित बच्चे पाए गए जिन्हें एनआरसी में भर्ती कराया गया। 52 बच्चों में डायरिया और 48 में गंभीर बीमारियों के लक्षण मिले हैं। अभियान की गति धीमी है, जिसे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
उज्जैन के एसपी प्रदीप शर्मा अपने नन्हे प्रशंसक सहस्रजीत तिवारी से मिलने उनके घर पहुंचे। सेंटमेरी स्कूल में दूसरी कक्षा का छात्र सहस्रजीत आठ महीने पहले एसपी का एक वीडियो देखकर उनका प्रशंसक बन गया था, जिसमें एसपी एक गुम हुए बच्चे को चॉकलेट खिला रहे थे। उसके पिता ने उससे वादा किया था कि अच्छा काम करने पर वे उसे एसपी से मिलवाएंगे। हाल ही में, सहस्रजीत ने पुलिस के ‘नशे से दूरी है जरूरी’ अभियान पर एक वीडियो बनाया, जिसे देखकर एसपी ने स्वयं बच्चे से मिलने का निर्णय लिया और उसका सपना पूरा किया।
दिलीप नगर में स्पीड ब्रेकर पार करते समय दो कारों की टक्कर में फ्रंट सीट पर खड़ा चार साल का बच्चा कार के कांच से बाहर जा गिरा और उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद विशेषज्ञों ने बच्चों की कार सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया है। उनके अनुसार, 135 सेंटीमीटर से कम ऊंचाई या ढाई साल से कम उम्र के बच्चों को पिछली सीट पर बैठाना चाहिए, जबकि पांच साल के बच्चों के लिए बूस्टर सीट या फारवर्ड-फेसिंग चाइल्ड कार सीट आवश्यक है। बच्चों को गोद में या सक्रिय एयरबैग वाली आगे की सीट पर बैठाना खतरनाक माना गया है।