रीवा जिले के गढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मॉल में 9 अगस्त 2026 की शाम पानी से भरे एक गड्ढे में डूबने से 8 वर्षीय आयुष पटेल और 7 वर्षीय अंशिका पटेल की मौत हो गई। बच्चे घर से बाहर थे और काफी देर तक दिखाई न देने पर परिजनों ने तलाश शुरू की, जिसके बाद वे गड्ढे में मृत पाए गए। घटना की जानकारी 10 अगस्त को गढ़ थाने में दी गई, जिसके बाद पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई शुरू की है। इस दर्दनाक हादसे ने क्षेत्र में खुले पानी से भरे गड्ढों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मध्य प्रदेश में बाल अपहरण के मामलों में पिछले पांच वर्षों में 64% की वृद्धि दर्ज की गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा लोकसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में प्रदेश में 11,594 बाल अपहरण के मामले दर्ज हुए, जो महाराष्ट्र (12,950) के बाद देश में दूसरा सर्वाधिक आंकड़ा है। देशभर में दर्ज कुल 75,108 मामलों में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत से अधिक है। हालांकि, वर्ष 2024 में 11,652 बच्चों को जीवित बरामद किया गया, जिसमें पिछले वर्षों के मामले भी शामिल हैं, जो तलाश और बचाव तंत्र में सुधार का संकेत देता है।
जबलपुर के बरेला थाना क्षेत्र के ग्राम शिलपुरी में आंगनबाड़ी से लौटे दो मासूम बच्चों की नाले में डूबने से मौत हो गई। छह वर्षीय साहिल परस्ते और पांच वर्षीय रोमिक पट्टा आंगनबाड़ी से छुट्टी के बाद दोस्तों संग नाले में नहाने गए थे, जहाँ गहराई का अंदाजा न मिलने से वे डूब गए। बच्चों के घर न लौटने पर परिजनों और ग्रामीणों ने खोजबीन की। ग्रामीणों ने उन्हें नाले से निकालकर अस्पताल पहुँचाया, जहाँ डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। बरेला थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
दमोह जिले के सेमरा गांव में पेट्रोल पंप निर्माण के लिए खोदे गए 15 फीट गहरे गड्ढे में डूबने से 10 वर्षीय सोनू यादव और 11 वर्षीय भविष्य यादव की मौत हो गई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गड्ढा दो साल से खुला था और स्कूल के पास होने के बावजूद सुरक्षा की मांग को अनसुना किया गया। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है और निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
नरसिंहपुर के न्यू आनंद मेले में तेज बारिश के दौरान झूला अचानक बंद हो जाने से 13 वर्षीय अर्पित राय और उसके 15 वर्षीय साथी राम ऊंचाई पर फंस गए। सतीश टॉकीज के सामने स्थित जनपद परिसर में हुए इस घटना से परिजनों और उपस्थित लोगों में चिंता फैल गई। अर्पित ने अपने मामा को फोन कर जानकारी दी, जिसके बाद झूला संचालक ने बच्चों को सुरक्षित नीचे उतारा। स्थानीय लोगों और परिजनों ने मेले में सुरक्षा मानकों के पालन और आपातकालीन स्थितियों से निपटने की व्यवस्था पर चिंता जताई है। मेला समिति ने इसे बड़ी लापरवाही मानते हुए गैर-जिम्मेदार कर्मचारी पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।