मध्य प्रदेश में लगभग दो दशक बाद सरकारी बस परिवहन व्यवस्था का पुनर्गठन किया जा रहा है, जिसका शुभारंभ 25 सितंबर को होगा। यह ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा’ पीपीपी मॉडल पर आधारित होगी और इसका उद्देश्य डेटा, तकनीक तथा निजी भागीदारी के माध्यम से संचालन, निगरानी एवं इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री ने इंदौर में इसकी घोषणा की थी। योजना के तहत प्रदेश के 55 जिलों में 1036 रूट चिह्नित किए गए हैं, जिनमें इंदौर से 23 रूट शामिल हैं। इसमें इलेक्ट्रिक बसों का संचालन, यात्री सुरक्षा और ग्रीन मोबिलिटी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इंदौर में सिंहस्थ के लिए प्रस्तावित सरकारी लक्जरी होटल की जमीन पर मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एमपीटी) और एआईसीटीएसएल के बीच विवाद उत्पन्न हो गया है। कृषि कॉलेज के सामने स्थित यह जमीन 2015-16 में एमपीटी को आवंटित की गई थी, जिस पर वर्तमान में एआईसीटीएसएल का बस डिपो है। एमपीटी ने जमीन खाली करने के नोटिस दिए हैं, जबकि एआईसीटीएसएल प्रशासन द्वारा उन्हें दिए गए आवंटन का हवाला दे रहा है। पर्यटन निगम सिंहस्थ से पहले होटल निर्माण का लक्ष्य रख रहा है, वहीं एआईसीटीएसएल इस जगह को अपने डिपो के लिए चाहता है।
मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री परिवहन सेवा का विस्तार हो रहा है, जिसके तहत इंदौर से प्रदेश के 27 दूरस्थ शहरों के लिए इंटर-सिटी बसें चलेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 25 सितंबर को इस सरकारी बस सेवा का शुभारंभ करेंगे। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर संचालित होने वाली इन बसों का परमिट, किराया और नियंत्रण सरकारी कंपनी के हाथ में रहेगा, जिससे मनमानी वसूली पर रोक लगेगी। नारंगी रंग की ये बसें छह श्रेणियों में उपलब्ध होंगी और इनमें व्हीकल ट्रैकिंग, मोबाइल ऐप जानकारी, डिजिटल टिकटिंग और ऑनलाइन शिकायत निवारण जैसी आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।
इंदौर में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा वंदन कार्यक्रम संपन्न हुआ, जिसमें पीएम ई-बस सेवा के तहत वर्तमान में संचालित 70 ई-बसों की संख्या बढ़ाकर 150 करने की घोषणा की गई। अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लि. परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य नागरिकों को सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना है। इंटरसिटी मार्गों पर इंदौर से कई शहरों और तीर्थस्थलों तक बसों का संचालन किया जा रहा है। महिला सुरक्षा हेतु पेनिक बटन, सीसीटीवी कैमरे और लाइव ट्रेकिंग सिस्टम जैसी सुविधाएं भी इन बसों में उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री ने इसे गरीबों, किसानों और विद्यार्थियों के लिए एक संकल्प की पूर्ति बताया।
राजधानी भोपाल में 10 दिन के ट्रायल के बाद गुरुवार से नई एयर कंडीशनंड इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू हो गया। पहले दिन दो रूटों पर चलीं 10 ई-बसों में 2 हजार से अधिक यात्रियों ने सफर किया, जिससे भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (बीसीएलएल) को 25 हजार रुपए से ज्यादा का राजस्व मिला। किराया लो-फ्लोर बसों के बराबर रखा गया है। पहले चरण में भोपाल को 100 इलेक्ट्रिक बसें मिलनी हैं, जिनमें से 21 बसें बैरागढ़ डिपो पहुंच चुकी हैं। यात्रियों ने शोर रहित और आरामदायक एसी सफर का अनुभव किया।
भोपाल में इलेक्ट्रिक बसों का यात्रियों के साथ ट्रायल रन अब 27 जुलाई के बजाय 29 जुलाई के बाद शुरू होगा। भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (बीसीएलएल) ने अपनी योजना में बदलाव किया है। इस दौरान 10 ई-बसों का संचालन दो निर्धारित रूटों पर होगा और यात्रियों को टिकट लेकर यात्रा करनी होगी। ट्रायल का उद्देश्य किराया संग्रह, टिकटिंग प्रणाली और यात्री संचालन व्यवस्था का परीक्षण करना है। राजधानी में कुल 245 ई-बसें चलाने की तैयारी है, जिनमें से 21 बसें पहले ही आ चुकी हैं। नियमित संचालन अगस्त में शुरू होने की उम्मीद है।