उमरिया के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के मानपुर बफर परिक्षेत्र में 4-5 वर्षीय बाघ का शव मिला, जिससे वन विभाग में हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने तत्काल मौके पर घेराबंदी कर जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में कोई संदिग्ध सामग्री नहीं मिली। डॉग स्क्वाड और मेटल डिटेक्टर की मदद से सघन तलाशी ली गई, जिसमें कोई फंदा या हथियार बरामद नहीं हुआ। पोस्टमार्टम में बाघ के दांत और नाखून सुरक्षित पाए गए, जिससे शिकार की आशंका कम हुई। मृत्यु के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विसरा नमूने वैज्ञानिक परीक्षण हेतु प्रयोगशाला भेजे गए हैं, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा।
भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआइआइ) देहरादून मध्य प्रदेश में मानव-हाथी द्वंद्व पर तीन वर्षीय अध्ययन करेगा। यह अध्ययन बांधवगढ़ और संजय गांधी टाइगर रिजर्व में हाथियों के व्यवहार और मूवमेंट को समझने के लिए होगा, जिससे संभावित संघर्षों का पूर्वानुमान लगाया जा सके। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को चार माह में मानव-हाथी संघर्ष से जुड़ी विस्तृत गाइडलाइन बनाने के निर्देश भी दिए हैं। अक्टूबर 2024 में बांधवगढ़ में दस हाथियों की मौत के बाद भी गाइडलाइन नहीं बनी थी। एक अन्य घटना में बलरामपुर में हाथी दांत के साथ तीन गिरफ्तार हुए।
विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में आधी रात को एक दुर्लभ जंगल कैट देखी गई। वर्षा से भीगी घास के बीच अपनी चमकती आंखों के साथ दिखी इस शर्मीली बिल्ली को वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर चेतन घरपुरे ने कैमरे में कैद किया। जंगल कैट अपनी एकांतप्रिय प्रकृति और शिकारी कौशल के कारण आसानी से दिखाई नहीं देती। विशेषज्ञों के अनुसार, बांधवगढ़ बाघों के अलावा अनेक दुर्लभ वन्यजीवों का भी आवास है। यह घटना बांधवगढ़ की समृद्ध जैव विविधता और उसके संरक्षण के महत्व को दर्शाती है।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बर्ड वाचिंग के लिए निकले तीन लोगों का बाघिन से महज चार-पांच फुट की दूरी पर अचानक सामना हो गया। यह घटना पतौर परिक्षेत्र की गंजरहा बीट में हलफल नदी के किनारे हुई। शाम के समय जब वे नदी से गुजर रहे थे, तो ताजे पगमार्क देखने के बाद अचानक बाघिन सामने आ गई और दहाड़ लगाई। सब कुछ दस सेकंड में हुआ। पाँच साल बीत जाने के बाद भी यह घटना उनकी यादों में जीवंत है, जो जंगल में सतर्कता और प्रकृति के सम्मान का संदेश देती है।