मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बिरसा विकास खंड में रहस्यमय बुखार से दो माह में आठ बच्चों की मौत हो गई है, जबकि सात बच्चे अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं। डॉक्टरों ने शुरुआत में मलेरिया की जांच की, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो पाई। राज्य मुख्यालय से आई विशेषज्ञ टीम भी बीमारी का पता लगाने में विफल रही। पूर्व मुख्यमंत्रियों कमल नाथ और दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर उचित जांच और सहायता की मांग की है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 93 बच्चे स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से ‘स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप-2’ से पीड़ित इंदौर की तीन वर्षीय बच्ची अनिका शर्मा के इलाज के लिए अतिरिक्त एक करोड़ रुपये की व्यवस्था करने की उम्मीद जताई है। इंजेक्शन की कीमत 9.55 करोड़ रुपये है, जिसमें से 8 करोड़ रुपये क्राउडफंडिंग और 50 लाख रुपये केंद्र सरकार से मिलने की उम्मीद है। कोर्ट ने सरकार से ऐसे मामलों को असाधारण मानकर मदद का तरीका खोजने को कहा है। अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।
इंदौर में एनर्जी ड्रिंक के नाम पर अत्यधिक कैफीन वाले पेय धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं, जिससे बच्चे और किशोर लत का शिकार हो रहे हैं। कम कीमत की छोटी बोतलें इसकी मुख्य वजह हैं। राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने इन पर सख्ती बरती है, लेकिन मध्य प्रदेश में अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने इंदौर से सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे हैं, लेकिन आगे की कार्रवाई के लिए केंद्रीय निर्देशों का इंतजार है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए संविदा आयुष चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। इसका उद्देश्य जिला और ब्लॉक स्तर पर रिक्त पदों को भरना है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत, आयुष डॉक्टर आंगनबाड़ियों और सरकारी स्कूलों में 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण करेंगे। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य नेटवर्क को मजबूत करेगी और बच्चों में जन्मजात बीमारियों, कुपोषण जैसी समस्याओं की समय पर पहचान व नि:शुल्क इलाज सुनिश्चित करेगी, जिससे पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की पहुंच भी बढ़ेगी।
खंडवा जिले में 14 जुलाई से 31 अगस्त तक चल रहे दस्तक अभियान के तहत शून्य से पांच वर्ष के बच्चों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है। अब तक 35,388 बच्चों की स्क्रीनिंग हुई है, जिसमें 183 कुपोषित बच्चे पाए गए जिन्हें एनआरसी में भर्ती कराया गया। 52 बच्चों में डायरिया और 48 में गंभीर बीमारियों के लक्षण मिले हैं। अभियान की गति धीमी है, जिसे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
रीवा की 11 वर्षीय बच्ची को जबलपुर के अपोलो जेबीपी हॉस्पिटल्स में जटिल रिजिड ब्रोंकोस्कोपी के माध्यम से सफल उपचार मिला। वह पिछले दो महीनों से खांसी, तेज बुखार और निमोनिया से पीड़ित थी। जांच में पता चला कि उसके बाएं फेफड़े में दो माह पहले गया पेन का कैप फंसा हुआ था, जिससे गंभीर संक्रमण और पस जमा हो गई थी। डॉ. अम्बरीश जोशी और उनकी टीम ने तत्काल ब्रोंकोस्कोपी कर पेन कैप निकाला, जिससे फेफड़े को गंभीर क्षति से बचाया जा सका। बच्ची अब स्थिर है और तेजी से स्वस्थ हो रही है।
पन्ना जिले के अजयगढ़ तहसील से ‘कंप्लीट प्रोलैप्स’ नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित 5 वर्षीय किशन कोरी को 27 जुलाई 2026 को जिला चिकित्सालय पन्ना लाया गया। उसकी नाजुक हालत देख सिविल सर्जन डॉ. आलोक कुमार गुप्ता ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्राथमिक उपचार सुनिश्चित किया। पन्ना कलेक्टर के निर्देश पर, रोगी कल्याण समिति कोष से परिवार को 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। प्राथमिक उपचार के बाद, बच्चे को उच्च विशेषज्ञ इलाज के लिए 108 एम्बुलेंस से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल रेफर किया गया। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की इस तत्परता की स्थानीय नागरिकों ने सराहना की है।
भोपाल के कमला नेहरू अस्पताल के पीडियाट्रिक सर्जरी वार्ड में गंभीर अव्यवस्थाएं उजागर हुई हैं। वार्ड में छह बेड एक छोटे कमरे में ठूंसकर लगे हैं, एसी बंद है और खिड़कियां टूटी हुई हैं। एक मासूम बच्ची बेड में दौड़ रहे करंट की चपेट में आने से बाल-बाल बची। परिजनों ने बताया कि बच्चे के ऑपरेशन के टांके खुलने और गर्मी से बच्चे के तड़पने जैसी घटनाएं भी हुईं। गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. कविता एन. सिंह और हमीदिया अस्पताल के सह-अधीक्षक डॉ. विजय वर्मा ने समस्याओं को स्वीकार करते हुए सुधार का आश्वासन दिया है।
सतना के सरदार वल्लभभाई पटेल जिला चिकित्सालय में 12 दिन के उपचार के बाद सर्पदंश पीड़ित 11 वर्षीय आंचल और 8 वर्षीय चचेरे भाई अनुराग स्वस्थ होकर घर लौट गए। करसरा गांव निवासी इन बच्चों को घर में सोते समय जहरीले सांप ने डस लिया था, जिसके बाद उन्हें गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. संदीप द्विवेदी के नेतृत्व में टीम ने पांच दिनों तक उन्हें वेंटिलेटर पर रखकर इलाज किया। अस्पताल से छुट्टी मिलने पर डॉक्टरों और स्टाफ ने केक काटकर बच्चों की नई जिंदगी का जश्न मनाया।