मध्य प्रदेश में अब छोटे अपराधों पर जेल की बजाय सामुदायिक सेवा की सजा दी जाएगी। यह दंड राज्य में पहली बार प्रभावी किया गया है, जिसके लिए गृह विभाग ने अधिसूचना जारी की है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत मानहानि, चोरी और आत्महत्या के प्रयास जैसे अपराधों में दोषी को अस्पताल की सफाई या पौधारोपण जैसे कार्य करने होंगे। सेवा की अवधि 1 से 60 दिन या 40 से 240 घंटे तक हो सकती है, जिसकी निगरानी जिला परिवीक्षा अधिकारी करेंगे।
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने कहा कि केवल अवैध हिरासत की आशंका व्यक्त करने से याचिका स्वीकार्य नहीं होती; याचिकाकर्ता को प्रथमदृष्टया यह दिखाना होगा कि संबंधित व्यक्ति वास्तव में किसी की अवैध हिरासत में है। रिंकू राजपूत द्वारा दायर इस याचिका में पत्नी के लापता होने और पुलिस की निष्क्रियता का आरोप था, लेकिन कोर्ट ने पाया कि अवैध हिरासत का कोई प्रमाण या तथ्य पेश नहीं किया गया। कोर्ट ने त्वरित जांच के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 528 के तहत वैकल्पिक कानूनी उपाय भी सुझाए।