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विदिशा स्टॉप डैम मामला: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया, मध्य प्रदेश सरकार से दो सप्ताह में रिपोर्ट मांगी

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने विदिशा में बेतवा नदी पर स्टॉप डैम के खंभों से कूदकर स्कूल जाने वाले बच्चों के मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने मध्य प्रदेश सरकार से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इससे पहले मध्य प्रदेश हाई कोर्ट भी इस मामले का संज्ञान ले चुका था। बच्चों को 15 किलोमीटर की लंबी सड़क यात्रा से बचने के लिए यह जोखिम उठाना पड़ता था। एक वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हाई स्कूल शुरू किया और अब स्थायी पुल बनाने की तैयारी चल रही है, जबकि तत्काल राहत के तौर पर स्टॉप डैम पर जालियां बिछाई गई हैं।

विदिशा में स्टाप डैम पार कर स्कूल जाते बच्चों के मामले पर हाई कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

विदिशा जिले के ककरुआ और आसपास के गांवों के बच्चे बेतवा नदी पर बने स्टाप डैम के पिलरों से जान जोखिम में डालकर स्कूल जाते हैं। यह रास्ता लगभग चार फीट के अंतराल वाले नौ पिलरों से होकर गुजरता है, जो बारिश में और खतरनाक हो जाता है। हाई कोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है और इसे बच्चों की सुरक्षा व शिक्षा के अधिकार से जुड़ा गंभीर विषय माना है। प्रशासन ने बैरिकेडिंग और चौकीदार तैनात किए हैं, जबकि शिक्षा विभाग ने एक माध्यमिक विद्यालय को हाई स्कूल में उन्नत करने का प्रस्ताव भेजा है। हाई कोर्ट अब सरकार से स्थायी समाधान पर जवाब मांगेगा।

विदिशा: स्कूली बच्चे जान जोखिम में डाल बेतवा नदी के स्टाप डैम से स्कूल जा रहे

विदिशा के ग्राम पलोह में स्कूली बच्चे बेतवा नदी के स्टाप डैम को पार कर जान जोखिम में डाल स्कूल जा रहे हैं। इसका एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुआ है। यह रास्ता सड़क मार्ग से पांच किलोमीटर दूर होने के बजाय एक किलोमीटर से कम पड़ता है, जिससे बच्चे लंबा चक्कर बचाने के लिए इसे अपनाते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बारिश में यह रास्ता खतरनाक हो जाता है और शहर से संपर्क टूट जाता है। सरपंच अमरसिंह ठाकुर ने पिछले साल भी ऐसे ही एक वीडियो के बाद बच्चों को इस रास्ते से बचने की सलाह दिए जाने की जानकारी दी।