मुनिश्री पद्मसागर महाराज ने सागर की वर्धमान कॉलोनी में अपने चातुर्मास के दौरान प्रवचन सभा में सत्याणुव्रत का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि सच्चा सत्याणुव्रत वही है जब व्यक्ति न स्वयं असत्य बोले और न दूसरों से बुलवाए। मुनिश्री ने जोर दिया कि सत्य ऐसा होना चाहिए जो धर्म और प्राणों की रक्षा करे। उन्होंने मुनिराज और गाय का दृष्टांत सुनाया, जिसमें उन्होंने बताया कि स्थूल सत्य बोलने से यदि किसी प्राणी की हत्या हो, तो वह धर्मसम्मत नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि मनुष्य दुनिया में झूठ बोलकर बच सकता है, पर अपने कर्मों के फल से नहीं।