मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने उज्जैन के रामोला मंदिर के 72 साल पुराने प्रबंधन और पुजारी अधिकार विवाद का मंगलवार को निराकरण किया। न्यायमूर्ति विनय सराफ ने अपने 62 पेज के फैसले में स्पष्ट किया कि रामोला मंदिर और उसकी संपत्तियों के स्वामी देवता श्रीराम हैं, जबकि मंदिर का प्रबंधन राज्य के राजस्व विभाग के अधीन रहेगा और कलेक्टर सिर्फ प्रबंधक होंगे। कोर्ट ने किसी निजी समाज को पुजारी नियुक्त करने या हटाने का अधिकार नहीं दिया, रतनदास की पुजारी नियुक्ति को वैध माना, लेकिन संपत्ति पर उनका या किसी समाज का मालिकाना हक नहीं माना।