डबरा में नगर पालिका प्रशासन द्वारा जनसमस्याओं और विकास कार्यों की अनदेखी के विरोध में एक दर्जन से अधिक पार्षदों ने अनोखा प्रदर्शन किया। दो दिनों से नगर पालिका कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे पार्षदों ने भैंस के आगे बैंड बजाकर अपना विरोध दर्ज कराया। उन्होंने प्रशासन पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए शहर की जर्जर सड़कें, गंदगी, बदहाल स्ट्रीट लाइट, गौशालाओं की बदहाली और पेयजल संकट जैसे मुद्दों को उठाया। इस आंदोलन में कांग्रेस, भाजपा, आम आदमी पार्टी और निर्दलीय पार्षद एकजुट दिखे।
नीमच में चार युवकों ने कलेक्टर कार्यालय परिसर में लोट लगाकर सड़क निर्माण की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि कानियाखेड़ी-अंबा माता रोड स्वीकृत होने और चार साल पहले भूमिपूजन होने के बावजूद पीडब्ल्यूडी और वन विभाग की एनओसी के कारण अटका है। इससे ग्रामीणों को कीचड़ भरे रास्ते से गुजरना पड़ रहा है। डिप्टी कलेक्टर चंद्र सिंह धार्वे सहित अन्य अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर युवकों की शिकायत सुनी। युवकों ने एनओसी की समस्या के समाधान और जल्द सड़क निर्माण की मांग करते हुए आवेदन भी दिया।
मध्य प्रदेश सांसद निधि (एमपीलैड्स) खर्च में देश में 13वें स्थान पर है, जहां 40.4% राशि खर्च हुई है। प्रदेश में महिला सांसदों ने पुरुष सांसदों को पछाड़ दिया है। सागर की डॉ. लता वानखेड़े ने 99.89% राशि खर्च कर शीर्ष स्थान प्राप्त किया, जबकि भोपाल सांसद आलोक शर्मा चौथे नंबर पर रहे। मुरैना के शिवमंगल सिंह तोमर सबसे पीछे हैं। राज्यसभा सांसदों में विवेक तन्खा ने सर्वाधिक 83.75% राशि खर्च की। एक सर्वेक्षण में लगभग 18% कार्य बदहाली में पाए गए और हर आठवें कार्य की मंजूरी में देरी हुई।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में सिंहस्थ मेले के लिए नए घाटों के निर्माण को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है। प्राकृतिक चट्टानों और सदियों पुराने प्राचीन घाटों को तोड़े जाने से कई लोग नाराज हैं। इंदौर के कुछ वकील इस मामले को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी कर रहे हैं। इस संबंध में संभागायुक्त भास्कर लक्षकार को ज्ञापन भी दिया गया है, जिसमें निर्माण कार्यों की जांच और उन पर रोक लगाने की मांग की गई है। वकीलों का कहना है कि यह ओंकारेश्वर की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान को प्रभावित कर सकता है।
उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर परिसर में एक हजार वर्ष पुराना शिव मंदिर फिर से आकार ले रहा है। वर्ष 2020-21 में खोदाई के दौरान इसके अवशेष मिले थे, जिनमें आधार भाग, गर्भगृह, शिवलिंग और कई प्रतिमाएं शामिल हैं। पुरातत्व विभाग इन अवशेषों के आधार पर भूमिज शैली में मंदिर का पुनर्निर्माण कर रहा है, जिसकी ऊंचाई 36 से 37 फीट रहेगी और लागत 65 से 90 लाख रुपये अनुमानित है। यह महाकाल मंदिर के प्राचीन इतिहास को पुनर्स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रिपरिषद बैठक से पूर्व कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ कीं। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त को 80वें स्वतंत्रता दिवस पर पहली बार राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् का गरिमापूर्ण गायन होगा। मुख्यमंत्री ने 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाने और 18 अगस्त से प्रदेशस्तरीय समरसता अभियान शुरू करने की भी जानकारी दी। पुलिस विभाग में 27,500 से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिला है। प्रदेश में दो अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित होंगी और पाँच नए हवाई अड्डे बनाए जाएंगे। कैबिनेट ने भोपाल को महानगर की तरह विकसित करने के 47,990 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी।
धार जिले की कुक्षी तहसील में कोटेश्वर तीर्थ के समीप सरदार सरोवर बांध के बैकवाटर क्षेत्र में 54 घंटे में 54 लाख रुपये की लागत से प्रदेश का पहला पक्का बैकवाटर घाट तैयार किया गया है। कोटेश्वर नर्मदा बहुउद्देशीय सेवा संस्थान द्वारा जनसहयोग और श्रमदान से निर्मित इस 100 फीट चौड़े, 230 फीट लंबे घाट में 54 सीढ़ियां और छह चबूतरे हैं। यह घाट श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्नान स्थल प्रदान करेगा और बैकवाटर के कारण 10 वर्षों से चली आ रही परेशानी को दूर करेगा। संस्थान ने भविष्य में घाट विस्तार और अन्य सुविधाओं के लिए 3.25 करोड़ रुपये के जनसहयोग का लक्ष्य रखा है।
भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रविवार को वार्ड 41 की जर्जर सड़कों और जलभराव की समस्या के विरोध में अनोखा प्रदर्शन किया। उन्होंने महापौर मालती राय की तस्वीर लेकर पानी से भरे गड्ढों में ‘बेशर्म’ के पौधे लगाए, जिसका उद्देश्य नगर निगम और जिला प्रशासन का ध्यान खींचना था। कांग्रेस नेताओं ने विकास कार्यों में भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा के जनप्रतिनिधि होने के बावजूद वार्ड 41 की सड़कें खराब हैं। कांग्रेस नेता मो. शावर खान ने तीन बार भूमिपूजन के बाद भी सड़क निर्माण शुरू न होने का जिक्र करते हुए महापौर निवास पर भी प्रदर्शन की चेतावनी दी।
मध्य प्रदेश में सात अगस्त से जनविश्वास अभियान शुरू होगा, जिसके तहत विकास कार्यों का निरीक्षण, जनशिकायतों का निराकरण और विभागीय राजनीतिक नियुक्तियों की समीक्षा की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर जिलों में लंबित नियुक्तियों का आकलन होगा। कई विभागों में अभी भी नियुक्तियां अधूरी हैं, जबकि मुख्यमंत्री ने पूर्व में एक माह और फिर 15 दिनों में प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए थे। अभियान के दौरान इन लंबित नियुक्तियों की समीक्षा की जाएगी और मुख्यमंत्री कार्यालय पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगा ताकि विभागीय समितियां सक्रिय होकर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में भूमिका निभा सकें।
इंदौर नगर निगम में भाजपा परिषद का चार साल का कार्यकाल पूरा हो गया है। इस दौरान परिषद ने बड़े प्रोजेक्टों पर जोर दिया, लेकिन शहर में दूषित पानी की आपूर्ति और गड्ढों से भरी सड़कों की समस्या बनी रही। पिछले साल भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से 35 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। इसके अतिरिक्त, 100 करोड़ रुपये का घोटाला भी उजागर हुआ, जिसकी जांच अभी जारी है। निगम ने 300 करोड़ रुपये का सोलर प्लांट लगाया और नर्मदा के चौथे चरण का काम शुरू किया, जिस पर 1,500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। हालांकि, नेहरू स्टेडियम स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और एमआर-4 सड़क जैसे कई प्रोजेक्ट अधूरे रहे।