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भोपाल मेट्रो परियोजना: जमीन खाली कराने में देरी, 2028 की समयसीमा पर चिंता

भोपाल मेट्रो परियोजना जमीन खाली कराने में चुनौतियों का सामना कर रही है, जिससे 2028 की प्रस्तावित समयसीमा पर चिंता बढ़ गई है। एम्स-करोंद कॉरिडोर में 40 आरा मशीनों की शिफ्टिंग अटकी हुई है, जिसके लिए मेट्रो प्रशासन 5.50 करोड़ रुपये दे चुका है। वहीं, अंडरग्राउंड कॉरिडोर का बड़ा बाग एग्जिट प्वाइंट जमीन और कब्रिस्तान विवाद में उलझा है, जहां मुस्लिम पक्ष 24 से 30 मीटर गहरी खोदाई का विरोध कर रहा है। प्रशासन ने जियोलाजिकल सर्वे शुरू किया है और कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने जल्द समाधान का आश्वासन दिया है।

भोपाल मेट्रो अंडरग्राउंड रूट पर दोनों टीबीएम ने 260 मीटर सुरंग बनाई

भोपाल मेट्रो के अंडरग्राउंड रूट पर दो टनल बोरिंग मशीनों (टीबीएम) ने अब तक 260 मीटर सुरंग का निर्माण कर लिया है। यह रूट भोपाल रेलवे स्टेशन और नादरा बस स्टैंड के नीचे से गुजर रहा है। मेट्रो अधिकारियों के अनुसार, यह कार्य अगले डेढ़ से दो साल में पूरा हो जाएगा। घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी और यातायात दबाव कम करने के उद्देश्य से भूमिगत कॉरिडोर बनाया जा रहा है। प्रदेश में पहली बार ऐसी दो टीबीएम मशीनों का उपयोग किया जा रहा है, जो जमीन से लगभग 60 फीट नीचे सुरंगें बना रही हैं। सुरक्षा उपायों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।