राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अपने मालवा प्रांत में मार्च अगले वर्ष से संगठनात्मक बदलाव करने जा रहा है। वर्ष 2009 में इंदौर और उज्जैन संभागों को मिलाकर मालवा प्रांत का गठन किया गया था। इस बदलाव के बाद ‘प्रांत प्रचारक’ के स्थान पर ‘संभाग प्रचारक’ का पद होगा। यह निर्णय पांच माह पूर्व हरियाणा में हुई आरएसएस की बैठक में लिया गया था। संघ का ध्यान अब युवा और सोशल इंजीनियरिंग पर केंद्रित है। इस पुनर्गठन के बाद प्रदेश में 11 संभाग होंगे, जिससे नए पदाधिकारी बनेंगे और उनके संपर्क बढ़ेंगे। इंदौर और उज्जैन संभागों के लिए अलग कार्यालय संचालित होंगे।
उज्जैन के रामघाट पर शिप्रा आरती को लेकर विवाद हो गया है, जहाँ महाकाल मंदिर समिति ने आरती की जिम्मेदारी अपने बटुकों को सौंप दी है। करीब 11 साल से आरती करा रहे तीर्थ पुरोहितों ने इसका विरोध किया और शुक्रवार शाम को बटुकों को रोकने का प्रयास किया। प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में पुरोहितों को घाट से हटाकर बटुकों द्वारा आरती कराई गई। प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय वैदिक शिक्षा को सम्मान देने और बटुकों के लिए नए अवसर खोलने के लिए लिया गया है, जबकि पंडा समिति इसे प्राचीन परंपरा में हस्तक्षेप मान रही है।
उज्जैन में शिप्रा नदी की आरती को लेकर तीर्थ पुरोहितों और महाकाल मंदिर समिति के बीच विवाद छिड़ गया है। यह विवाद समिति द्वारा अपने वैदिक प्रशिक्षण संस्थान के 21 बटुकों से आरती कराने के बाद शुरू हुआ। तीर्थ पुरोहित इसे अपनी 500 वर्ष पुरानी परंपरा का हनन बता रहे हैं और उन्होंने जल सत्याग्रह भी किया। मंदिर समिति का कहना है कि यह आयोजन निःशुल्क है और इसका उद्देश्य वैदिक शिक्षा को सम्मान दिलाना है, जिसमें वे पुरोहितों की परंपराओं में हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं।
हाईकोर्ट में उज्जैन के प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास कार्यों को बिना योजना के शुरू करने पर शासन जवाब नहीं दे सका। जनहित याचिका में बांड जारी करने की योजना को चुनौती दी गई थी, जिसके लिए आवश्यक अनुमतियां नहीं ली गई हैं। उज्जैन विकास प्राधिकरण और नगर निगम ने तीन प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार व नवनिर्माण के लिए टेंडर जारी किए हैं, जिनकी अनुमानित लागत 300 करोड़ रुपये है। परियोजना के लिए न तो प्रशासनिक-वित्तीय स्वीकृतियां हैं और न ही जमीन का अधिग्रहण हुआ है। सरकार ने जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा है।