ग्वालियर की 27 वर्षीय रेखा बाथम, जो स्वयं कभी असाक्षर थीं, अब 100 से अधिक लोगों को अक्षर ज्ञान प्रदान कर रही हैं। 2021 में पति की मृत्यु के बाद दो बच्चों का बोझ संभालने वाली रेखा ने बच्चों की शिक्षा और दैनिक जीवन की चुनौतियों से प्रेरित होकर 2025 में पढ़ना-लिखना सीखा। वह सप्ताह में दो दिन सरकारी स्कूल किलागेट पर कक्षाएं लेती हैं और उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत लोगों को साक्षर बना रही हैं। रेखा अपनी जीविका चलाने के लिए घरों में भी काम करती हैं।
भोपाल के ‘अपना घर’ वृद्धाश्रम में 70 वर्षीय घनश्याम की मृत्यु के बाद उनके चार बच्चों ने अंतिम संस्कार में शामिल होने से इनकार कर दिया। आश्रम प्रबंधन को दो दिन तक शव रखना पड़ा और अंततः पुलिस की सहायता से अंतिम संस्कार कराया गया। बेटियों ने संपत्ति न मिलने का हवाला दिया, जबकि बेटों ने कहा कि पिता ने उनके लिए कुछ नहीं किया। आश्रम संचालिका माधुरी मिश्रा ने बताया कि परिवार ने बाद में मृत्यु प्रमाण पत्र मांगा, जिसे देने से इनकार कर दिया गया। यह घटना बुजुर्गों के प्रति बढ़ती संवेदनहीनता को दर्शाती है।
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कुशवाह समाज पर की गई अपनी टिप्पणी के लिए लिखित माफीनामा पेश किया है। उन्होंने एक सम्मेलन में कहा था कि कुशवाह समाज बीच-बीच में गुलाटी मार जाता है, जिससे समाज की विश्वसनीयता खंडित हुई है। इस बयान के बाद कुशवाह समाज ने सोशल मीडिया पर विरोध प्रदर्शन किया और जौरा में तोमर का पुतला भी फूंका। तोमर के माफीनामे के बाद यह विवाद शांत हो गया।