जबलपुर हाई कोर्ट से सेवानिवृत्त हुए न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह ने देहदान और ₹1.01 करोड़ के दान का संकल्प लिया है। उन्होंने अपनी पत्नी के साथ मेडिकल कॉलेज, जबलपुर में देहदान के लिए पंजीकरण कराया, ताकि उनकी देह मेडिकल विद्यार्थियों के अध्ययन में काम आ सके। न्यायमूर्ति सिंह ने अपने जीपीएफ से ₹1.01 करोड़ प्रधानमंत्री केयर्स फंड में दान करने की घोषणा भी की। उनका यह समर्पण समारोह में मौजूद लोगों को भीतर तक छू गया और उनके व्यक्तित्व के संवेदनशील पक्ष को उजागर किया। उन्होंने अपनी न्यायिक यात्रा में मिले सहयोग के लिए कर्मचारियों और अधिवक्ताओं का आभार व्यक्त किया।
हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मचारी महेंद्र सिंह ठाकुर के जाति प्रमाण-पत्र की वैधता से संबंधित 21 साल पुराने एकलपीठ के आदेश को निरस्त कर दिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने कहा कि जब कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुका है और विभागीय जांच में उसका प्रमाण-पत्र वैध पाया गया है, तो इतने लंबे अंतराल के बाद हाई पावर कमेटी से जांच कराने का कोई उपयोगी उद्देश्य नहीं है। कोर्ट ने 2005 और 2008 के संबंधित आदेशों को रद्द कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 61 वर्ष करने पर विचार करने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने यह निर्देश देशभर के जिला न्यायपालिका के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। यह अंतरिम व्यवस्था 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगी और संबंधित उच्च न्यायालयों से परामर्श के बाद राज्यों को दो सप्ताह में अपना पक्ष रखना होगा।