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मप्र पुलिस में आरक्षक से इंस्पेक्टर पदोन्नति प्रक्रिया तेज, पीएचक्यू का डीपीसी बैठकें सितंबर-नवंबर में कराने का निर्देश

मप्र पुलिस में आरक्षक से इंस्पेक्टर संवर्ग की पदोन्नति प्रक्रिया को तेज करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने कदम उठाए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग के मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 के तहत, पीएचक्यू ने सभी पुलिस इकाइयों को सितंबर से नवंबर के बीच विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठकें आयोजित करने का निर्देश दिया है। स्पेशल डीजी प्रशासन आदर्श कटियार द्वारा 1 सितंबर को जारी पत्र में चयन वर्ष 2027 (31 दिसंबर 2027 तक की रिक्तियों) के लिए पात्र लोक सेवकों पर विचार करने को कहा गया है। नए नियमों के अनुसार, डीपीसी बैठकें अब वार्षिक कैलेंडर का हिस्सा होंगी।

प्रदेश के अधिकारियों-कर्मचारियों को अगले साल फिर मिलेगी पदोन्नति

प्रदेश सरकार एक लाख से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों को इस साल पदोन्नति देने के बाद अगले साल फिर से पदोन्नति की तैयारी कर रही है। इसमें पांच वर्ष की सेवा पूरी करने वाले और वर्ष 2016 से पदोन्नति पर रोक के चलते रुके हुए अधिकारी-कर्मचारी पात्र होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अक्टूबर-नवंबर में विभागीय पदोन्नति समिति की बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए हैं, जिसके लिए पदोन्नति नियमों में संशोधन किया जाएगा। न्यूनतम सेवा अवधि में छूट का प्रविधान कर 31 दिसंबर 2027 तक के प्रत्याशित पदों को भी शामिल किया जाएगा।

रीवा मेडिकल कॉलेज की डॉक्टर सोनल अग्रवाल की सेवाएं समाप्त, साढ़े तीन साल बाद कार्रवाई पर सवाल

रीवा मेडिकल कॉलेज की सहायक प्राध्यापक डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवाएं 16 सितंबर 2026 को समाप्त कर दी गईं। यह कार्रवाई मरीजों को निजी नर्सिंग होम भेजने की शिकायत पर हुई, जिसकी जांच रिपोर्ट और अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश साढ़े तीन साल पहले 1 मार्च 2023 को एक उच्चस्तरीय समिति ने की थी। अब सवाल यह उठ रहा है कि जांच पूरी होने के बाद अंतिम निर्णय लेने में इतना लंबा समय क्यों लगा। चिकित्सा शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगे हैं और देरी के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की जा रही है। अधिकारियों ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।

मध्य प्रदेश में पटवारियों को 24 घंटे में काम पर लौटने का अल्टीमेटम, सेवा समाप्ति की चेतावनी

मध्य प्रदेश प्रशासन ने स्वामित्व योजना के विरोध में सामूहिक अवकाश पर गए पटवारियों को 24 घंटे में काम पर लौटने का अल्टीमेटम दिया है। विशेष रूप से परिवीक्षाधीन पटवारियों को चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समय-सीमा में कार्यभार ग्रहण न करने पर उनकी सेवाएं मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियमों के तहत समाप्त कर दी जाएंगी। प्रशासन ने सामूहिक अवकाश को अनधिकृत अनुपस्थिति मानते हुए पटवारियों का वेतन काटने के आदेश भी दिए हैं। पूर्व में तीन परिवीक्षाधीन पटवारियों की सेवाएं समाप्त की जा चुकी हैं, जिसके विरोध में 1000 से अधिक पटवारियों ने प्रदर्शन किया था।

मंत्रालय सेवा संघ ने अगली डीपीसी में अर्हताकारी सेवा नियम में पूर्ण छूट का आग्रह किया

मध्य प्रदेश में 10 साल बाद हुई पदोन्नति प्रक्रिया का पहला चरण पूरा होने के बाद, मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ ने आगामी डीपीसी में अर्हताकारी सेवा नियम में पूर्ण छूट की मांग की है। संघ ने सितंबर 2026 और जनवरी 2027 में प्रस्तावित डीपीसी के लिए यह अनुरोध किया है, ताकि नियमों में विसंगति के कारण प्रभावित हुए अधिकारियों-कर्मचारियों को न्याय मिल सके। संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से असाधारण परिस्थितियों को देखते हुए सभी पात्र अधिकारियों-कर्मचारियों को एक बार के लिए अगली पदोन्नति के विचारण क्षेत्र में शामिल करने का आग्रह किया है।