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2026-10-17

उज्जैन में शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने के दौरान पथराव, आंसू गैस और लाठीचार्ज

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, उज्जैन।

उज्जैन में सोमवार सुबह शाही मस्जिद के बाहर अचानक तनाव बढ़ गया। सड़क चौड़ीकरण के लिए मस्जिद का एक हिस्सा हटाने की कार्रवाई शुरू हुई तो विरोध कर रहे लोग पुलिस के सामने आ गए। इस दौरान पथराव हुआ, आंसू गैस के गोले छोड़े गए और पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। नमाज के वक्त कार्रवाई रोकनी पड़ी तथा शहर के कई बाजार और निजी स्कूल बंद रहे।

सड़क चौड़ीकरण की आवश्यकता

उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिए दो सड़कें 15 मीटर चौड़ी की जा रही हैं। शाही मस्जिद कोयला फाटक से कंठाल चौराहा और सती गेट होते हुए गोपाल मंदिर जाने वाली सड़क पर स्थित है, जो आगे महाकाल मंदिर से जुड़ती है। इस हिस्से की लंबाई लगभग डेढ़ किलोमीटर है और इससे 323 मकान प्रभावित हो रहे हैं। नगर निगम ने अदालत में बताया कि शाही सवारी, पेशवाई और सिंहस्थ के दौरान भीड़ व जाम से बचने के लिए सड़क चौड़ीकरण आवश्यक है। मस्जिद का कितना हिस्सा हटाया जाएगा, इस पर अब तक अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं।

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घटनाक्रम का विस्तृत विवरण

नगर निगम ने मस्जिद प्रबंधन को हिस्सा हटाने के लिए तीन नोटिस दिए थे। यह मामला 9 सितंबर को अदालत पहुंचा और सोमवार को सड़क पर आ गया। 9 सितंबर को इंदौर बेंच में न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट ने मस्जिद पक्ष (वक्फ पंचायत मोचियान से जुड़े दो पक्ष) की याचिकाएं खारिज कर दी थीं और कोई स्थगन आदेश नहीं दिया था। इसके बाद कमेटी ने डबल बेंच (दो जजों की बेंच) में अपील की। रविवार, 27 सितंबर को पुलिस, आरएएफ और एसटीएफ के 600 से अधिक जवानों ने फ्लैग मार्च किया। रविवार रात को प्रशासन और शहर काजी खलीकुर्रहमान के बीच सहमति बनी कि मशीनें नहीं चलेंगी और मस्जिद से जुड़े लोग खुद हिस्सा हटाएंगे। सोमवार, 28 सितंबर की सुबह काम शुरू हुआ। मस्जिद से जुड़े कुछ लोगों ने हथौड़े से मेहराब हटाते हुए रो पड़े और अल्लाह से माफी मांगी। इसी दौरान समाज का दूसरा गुट विरोध में उतर आया, जिससे स्थिति बिगड़ी।

उच्च न्यायालय का निर्णय एवं समझौते की शर्तें

उच्च न्यायालय ने अपील खारिज कर दी और नगर निगम द्वारा दिए गए आश्वासनों को बाध्यकारी माना। सुनवाई में कमेटी की ओर से समझौते की कुछ शर्तें बताई गईं। इनमें कटे हिस्से के बदले मस्जिद को टीडीआर (स्थानांतरणीय विकास अधिकार) और एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) मिलेगा, जिससे वह ऊंचाई और मीनार बना सकेगी। एफएआर का अर्थ है कि प्लॉट पर कितना निर्माण हो सकता है, जबकि टीडीआर वह निर्माण-अधिकार है जिसका उपयोग जमीन गंवाने पर कहीं और किया जा सकता है। यह समझौता कमेटी के वकील द्वारा बताई गई शर्तों पर आधारित है और निगम की तरफ से लिखित पुष्टि अभी नहीं आई है। इससे पहले 9 सितंबर को सिंगल बेंच ने 27 पेज के आदेश में यह माना था कि निगम ने मस्जिद प्रबंधन को सुनवाई का मौका दिया है। अदालत ने यह भी कहा था कि यह कार्रवाई केवल एक ही धार्मिक स्थल तक सीमित नहीं है और निगम उज्जैन विकास योजना-2035 के तहत कार्रवाई कर सकता है, जो शहर के भविष्य के नक्शे का सरकारी दस्तावेज है और इसमें सड़कें तथा जमीन का उपयोग तय होता है।

विभिन्न पक्षों की दलीलें

इस मामले में कुल चार पक्ष हैं। मस्जिद कमेटी और वक्फ पक्ष का दावा है कि मस्जिद सदियों पुरानी है और इमाम ने इसके 1390 में बनने का दावा किया है। रिपोर्ट्स में 1925 के सिंधिया राजघराने के दस्तावेज, 1975 में सड़क के लिए जमीन देने और 1985 के राजपत्र में उल्लेख की बात है। ये सभी पक्ष के दावे हैं, जिनकी अलग से पुष्टि नहीं हुई है। पक्ष का यह भी कहना है कि वक्फ बोर्ड को उचित नोटिस नहीं मिला और सड़क का अलाइनमेंट बदला जा सकता है। पक्ष ने अनुच्छेद 25 का भी हवाला दिया। याचिका में जमातखाना (नमाज की जगह), लगभग 120 फीट ऊंची मीनार और मजहर चौक प्रभावित होने की बात थी। प्रशासन का तर्क है कि सिंहस्थ में 30-40 करोड़ श्रद्धालुओं तक का अनुमान है, इसलिए चौड़ीकरण आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने 40 करोड़ से अधिक का आंकड़ा दिया है। कलेक्टर ने अफवाहों से बचने की अपील की है। वक्फ बोर्ड को नोटिस न मिलने के दावे पर अदालत पहले ही निगम के पक्ष में राय दे चुकी है। शहर काजी ने बताया कि प्रशासन और कमेटी में रात में सहमति बनी थी और कमेटी खुद हिस्सा हटा रही थी। वक्फ बोर्ड अध्यक्ष सनवर पटेल ने कहा कि पूरी मस्जिद नहीं हट रही है, केवल सड़क की जद वाला हिस्सा हट रहा है। दोनों ने अफवाहों से बचने की अपील की। समाज का दूसरा गुट कार्रवाई का विरोध कर रहा है और सोमवार को इसी विरोध में स्थिति बिगड़ी थी। वहीं कुछ हिंदू संगठनों ने मांग की थी कि किसी भी धार्मिक निर्माण पर कार्रवाई हो, तो सभी के लिए एक जैसी नीति अपनाई जाए।

अन्य धार्मिक स्थलों पर भी कार्रवाई

शाही मस्जिद अकेली नहीं है, बल्कि उसी सड़क पर स्थित 15 में से 12 धार्मिक स्थल पहले ही हटाए जा चुके हैं।