बुलंद सोच, बड़वानी।

बड़वानी के पीजी कॉलेज में विद्यार्थियों का धरना गुरुवार रात लगभग 10 बजे अचानक उग्र माहौल में बदल गया। यह आंदोलन खेल मैदान और अन्य सुविधाओं की मांग को लेकर 24 घंटे से अधिक समय से जारी था।
छात्र-छात्राएं प्राचार्य कक्ष के बाहर डटे रहे और मांगों का लिखित एवं हस्ताक्षरित आश्वासन मिलने तक आंदोलन समाप्त न करने की बात पर अड़े रहे। देर रात तक कॉलेज परिसर में नारेबाजी और विरोध का दौर चलता रहा।
विद्यार्थियों की प्रमुख मांगों में 400 मीटर रनिंग ट्रैक, छात्राओं के लिए पृथक वाशरूम व चेंजिंग रूम सहित खेल मैदान से जुड़ी अन्य सुविधाएं शामिल रहीं।
प्रशासन और पुलिस की भूमिका
दिनभर प्रशासन, पुलिस और कॉलेज प्रबंधन के अधिकारियों ने विद्यार्थियों से कई दौर में चर्चा की, लेकिन रात तक मांगों को लेकर कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मौके पर सुरक्षा घेरा बनाया। रात में विद्यार्थियों ने प्राचार्य को उनके कक्ष के भीतर घेर लिया।
पुलिस ने स्थिति को देखते हुए प्राचार्य को कॉलेज परिसर से बाहर निकाला। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में पुलिसकर्मी प्राचार्य को सुरक्षा घेरे में कॉलेज से उनके घर तक लेकर गए।
विद्यार्थियों का प्रतिरोध और तनाव
प्राचार्य को वाहन से ले जाने के प्रयास के दौरान विद्यार्थियों ने विरोध प्रदर्शन किया। कुछ छात्र सड़क पर लेट गए और वाहन के आगे भी बैठकर या लेटकर विरोध जताया।
विद्यार्थियों को हटाने और रास्ता बनाने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
आंदोलन के दौरान छात्र संघ से जुड़े दो गुटों के विद्यार्थियों के बीच बहसबाजी और विवाद की स्थिति भी बनी।
बाद में पुलिस ने विद्यार्थियों को कॉलेज परिसर से बाहर कराया और मुख्य गेट बंद कर दिया। पुलिस की इस कार्रवाई को लेकर कुछ विद्यार्थियों में नाराजगी भी दिखाई दी।
इसके बाद कई विद्यार्थी अपनी शिकायत और विरोध दर्ज कराने के लिए थाने पहुंचे। आधी रात तक कॉलेज परिसर, मुख्य मार्ग और थाने के आसपास मामले को लेकर गहमागहमी बनी रही।
धरने का समापन और लंबित मांग
देर रात विद्यार्थियों का धरना समाप्त हो गया, लेकिन उनकी लिखित आश्वासन की मांग बनी रही।
इस घटनाक्रम पर प्राचार्य की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। पुलिस की ओर से भी देर रात तक आगे की कार्रवाई को लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई।
विद्यार्थियों का कहना है कि मांगों के संबंध में लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही वे आंदोलन को पूरी तरह समाप्त मानेंगे।

