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माखनलाल विश्वविद्यालय में डॉ. पी. शशिकला की एसोसिएट प्रोफेसर नियुक्ति को हाई कोर्ट में चुनौती

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, जबलपुर।

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल की वर्तमान रजिस्ट्रार एवं प्रोफेसर डॉ. पी. शशिकला की वर्ष 2014 में न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर पद पर हुई नियुक्ति को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। हाई कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए डॉ. शशिकला सहित सात प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए हैं।

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यह याचिका डॉ. आशुतोष मिश्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के.सी. घिडियाल और अधिवक्ता संपत कुमार कुशवाहा ने दायर की है।

मार्च 2012 में जारी अधिसूचना के अनुसार, एसोसिएट प्रोफेसर पद के लिए पीएचडी, आठ वर्ष का शिक्षण अनुभव, निर्धारित एपीआई स्कोर और कंप्यूटर एप्लीकेशन अथवा मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री जैसी योग्यताएं निर्धारित थीं।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि जुलाई 2014 में नियुक्ति के समय डॉ. शशिकला इन शर्तों को पूरा नहीं करती थीं। मामले में कहा गया है कि डॉ. शशिकला के पास 1996 की एमएससी कंप्यूटर साइंस और 2010 की पीएचडी है, लेकिन उनके पास एमसीए की डिग्री नहीं है। इसी आधार पर निर्धारित योग्यता पूरी होने पर सवाल उठाया गया है।

पीएचडी के दौरान नियमित सेवा में रहने और अवकाश संबंधी नियमों के पालन पर भी आपत्ति उठाई गई है। इसके अतिरिक्त, जुलाई 2014 में एसोसिएट प्रोफेसर पद पर नियुक्ति के बाद नवंबर 2016 में प्रोफेसर पद पर हुई पदोन्नति को भी चुनौती दी गई है।

दावा किया गया है कि करियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत प्रोफेसर पद पर पदोन्नति के लिए तीन वर्ष का अनुभव आवश्यक था, जबकि यह पदोन्नति इस अवधि से पहले कर दी गई।

इस मामले में राज्य सरकार, उच्च शिक्षा व जनसंपर्क विभाग, पूर्व कुलपति बी.के. कुठियाला और डॉ. सी.पी. अग्रवाल सहित कुल सात प्रतिवादियों को पक्षकार बनाया गया है।

इन आरोपों पर प्रतिवादियों का पक्ष और नियुक्ति तथा पदोन्नति की वैधता पर अंतिम निर्णय अभी आना शेष है।