बुलंद सोच, भोपाल।

ग्राम खोकरिया के नर्मदा प्रसाद ने मंगलवार को कलेक्टोरेट पहुंचकर शिकायत की कि वे 26 साल से गांव की आबादी में मकान बनाकर रह रहे हैं, लेकिन उनका परिवार सरकारी स्वामित्व योजना में शामिल नहीं है। नर्मदा प्रसाद, पिता बापूलाल, ने अपने आवेदन में बताया कि वे वर्ष 2000 से खोकरिया गांव में निवास कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि उनके मकान का रिकॉर्ड स्वामित्व योजना में शामिल किया जाए और उसकी रजिस्ट्री कराई जाए। स्वामित्व योजना का उद्देश्य आबादी क्षेत्र में वर्षों से रह रहे लोगों को उनके मकान का अधिकार और दस्तावेज उपलब्ध कराना है, लेकिन नर्मदा प्रसाद का मामला अब तक इस प्रक्रिया से बाहर है। जनसुनवाई में कलेक्टर की अनुपस्थिति में एडीएम सुमित पांडे ने इस मामले की जांच हुजूर एसडीएम विनोद सोनकिया को सौंपी।
सरपंच का इस्तीफा और सचिव पर आरोप
ग्राम पंचायत अगरिया के सरपंच सुनील कुमार ने पंचायत सचिव हेम सिंह राजपूत पर विकास कार्यों में लापरवाही के आरोप लगाते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सरपंच सुनील कुमार ने बताया कि उन्होंने सचिव की कार्यप्रणाली को लेकर कई बार अधिकारियों से शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने लगातार बने इन हालातों के कारण पंचायत में सरपंच पद संभालने में अपनी असमर्थता व्यक्त करते हुए इस्तीफा स्वीकार करने की मांग की। एडीएम प्रकाश नायक ने इस मामले की जांच जिला पंचायत सीईओ इला तिवारी को सौंपी है।
पत्नी को वापस लाने की गुहार
बैरसिया तहसील के ललरिया निवासी मोहम्मद जुनैद ने अपनी पत्नी को वापस घर लाने में प्रशासन से मदद की गुहार लगाई। जुनैद ने अपने आवेदन में बताया कि उनकी शादी छह साल पहले विदिशा जिले के सेऊ नटेरन निवासी फिरदौस से हुई थी और उनके दो बच्चे हैं। उनकी पत्नी लगभग एक साल पहले दोनों बच्चों को छोड़कर अपने मायके चली गई और कई प्रयासों के बावजूद वापस आने को तैयार नहीं है। जुनैद ने अपने ससुर और साले पर अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए बताया कि थाने में शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।
जनसुनवाई में दर्ज शिकायतें
मंगलवार को हुई जनसुनवाई में कुल 153 लोगों ने शिकायतें दर्ज कराकर प्रशासन से राहत की मांग की।
आयुष इंटर्न डॉक्टरों की स्टाइपेंड वृद्धि की मांग
मध्य प्रदेश में आयुष इंटर्न डॉक्टरों ने स्टाइपेंड बढ़ाने के लिए प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि जहां बंगाल में 33 हजार रुपये का स्टाइपेंड मिलता है, वहीं मध्य प्रदेश में यह केवल 9,383 रुपये है।

