बुलंद सोच, इंदौर।

इंदौर में मंगलवार को भूमिगत मेट्रो की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए पहली बार जमीन के नीचे टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) चली। टीबीएम ‘नर्मदा’ ने एयरपोर्ट स्टेशन से टनल की खोदाई शुरू की। इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और हाइड्रोलिक सिस्टम की जांच पूरी होने के बाद शाम करीब सात बजे टीबीएम को चालू किया गया।
टीबीएम 'नर्मदा' की कार्यप्रणाली
यह मशीन लगभग 102 मीटर लंबी और 6.65 मीटर व्यास के कटिंग व्हील वाली है, जो करीब 20 मीटर गहराई तक जाकर भूमिगत टनल तैयार करेगी। शुरुआती चरण में मशीन से निकलने वाली मिट्टी कन्वेयर के माध्यम से बाहर आएगी। टीबीएम के 20 मीटर अंदर जाने के बाद लोकोमोटिव इंजन को टनल में उतारा जाएगा, जिसके पीछे तीन ट्रालियां रहेंगी जिनमें खोदाई से निकली मिट्टी भरकर बाहर लाई जाएगी। लोकोमोटिव का उपयोग करीब दो से तीन दिन बाद शुरू होने की संभावना है। टीबीएम के आगे बढ़ने पर प्रत्येक लगभग 1.4 मीटर खुदाई के बाद करीब 48.6 घनमीटर मिट्टी निकलेगी, जिसे ट्रॉलियों के जरिए बाहर लाया जाएगा। करीब पांच से सात दिन बाद टीबीएम के पीछे अस्थायी पटरियां बिछाने का काम शुरू होगा, जिन पर लोकोमोटिव इंजन और ट्रालियां मिट्टी बाहर निकालने के लिए आगे बढ़ेंगी। टीबीएम को आगे बढ़ाने और घुमाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली हाइड्रोलिक प्रेसर मशीन को फिलहाल जमीन के ऊपर रखा गया है, जिसे टीबीएम के जमीन के भीतर गहराई में जाने के साथ नीचे उतारा जाएगा। मशीन के आगे बढ़ने के साथ प्री-कास्ट कंक्रीट रिंग्स लगाकर टनल की संरचना तैयार की जाएगी।
सुरक्षा और निगरानी
‘नर्मदा’ अर्थ प्रेशर बैलेंस शील्ड (ईपीबी) मिक्स शील्ड तकनीक पर आधारित है, जिसमें गैस मानिटरिंग सिस्टम, वन-सेकंड इमरजेंसी स्टाप और 24×7 कंट्रोल रूम मानिटरिंग जैसी व्यवस्थाएं हैं। मशीन ने 25 अप्रैल को थाईलैंड में फैक्ट्री एसेप्टेंस टेस्ट पूरा किया था, जिसके बाद इसे इंदौर लाकर असेंबल किया गया और एयरपोर्ट स्टेशन से लान्च किया गया। भूमिगत खोदाई के दौरान आसपास के मकानों और जमीन की सुरक्षा के लिए इंस्ट्रूमेंटेशन स्कीम लागू की गई है, जिसके तहत सेंसर जमीन और भवनों में होने वाले मामूली बदलावों को भी रिकॉर्ड करेंगे ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जा सके। मेट्रो के प्रबंध संचालक एस कृष्ण चैतन्य ने अधिकारियों और तकनीकी टीम को सुरक्षा, गुणवत्ता और तकनीकी मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। छोटा गणपति मेट्रो स्टेशन नई ‘नेटम’ तकनीक से बनाया जाएगा, जिससे मकानों को कोई नुकसान नहीं होगा।

