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2026-10-17

ब्रिक्स सिर्फ बड़े बाजार नहीं, आर्थिक नेटवर्क: जय श्रॉफ

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, नई दिल्ली।

नई दिल्ली में ब्रिक्स बिजनेस फोरम की शुरुआत हो गई है। यह आयोजन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के तहत हो रहा है, जिसमें सदस्य देशों के कारोबारी और सरकारों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल कार्यक्रम में वक्ताओं में शामिल हैं।

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ब्रिक्स बिजनेस फोरम हर साल उस देश में आयोजित किया जाता है, जहां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन होता है। नेताओं की बैठक से ठीक पहले होने वाले इस मंच का मकसद कारोबार, निवेश, वित्त, तकनीक और टिकाऊ आर्थिक विकास जैसे मुद्दों पर सरकार और निजी क्षेत्र के बीच चर्चा करना है।

ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल के अध्यक्ष जय श्रॉफ ने ब्रिक्स को केवल बड़े बाजारों का समूह न मानकर एक ऐसे आर्थिक नेटवर्क के रूप में देखने की बात कही, जहां सदस्य देशों की ताकत एक-दूसरे के काम आ सके। उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता की चार प्राथमिकताओं पर आधारित है। श्रॉफ के अनुसार, ये प्राथमिकताएं केवल सरकारों के लिए नहीं, बल्कि कारोबार के लिए भी उतनी ही प्रासंगिक हैं।

उनके मुताबिक, एक अर्थव्यवस्था का संसाधन दूसरे देश के विनिर्माण को सहारा दे सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि एक बाजार में विकसित तकनीक दूसरे ब्रिक्स बाजार में बड़े पैमाने पर उपयोग पा सकती है और पूंजी को नई परियोजनाएं मिल सकती हैं।

यह फोरम ब्रिक्स के निजी क्षेत्र से जुड़ाव का प्रमुख मंच है, जहां बिजनेस काउंसिल की ओर से तैयार सुझाव और सिफारिशें नीति निर्माताओं के सामने रखी जाती हैं। बिजनेस काउंसिल की सिफारिशें और फोरम के नतीजे ब्रिक्स की आर्थिक प्राथमिकताओं और आगे के कार्यक्रमों को प्रभावित कर सकते हैं।

इन चर्चाओं से ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने, डिजिटल अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने, छोटे और मझोले कारोबार को मजबूत करने, साझा मानकों पर सहयोग और आपूर्ति श्रृंखला को बेहतर बनाने जैसी पहलों को दिशा मिल सकती है। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में व्यापार, डिजिटल तकनीक, वित्त, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक शासन में सुधार जैसे क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने पर जोर रहा है।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का मुख्य कार्यक्रम 12 सितंबर से शुरू होगा। इसमें सदस्य देशों के नेता भारत की अध्यक्षता के दौरान शुरू की गई पहलों और ब्रिक्स की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे।

सम्मेलन में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक मजबूत बनाने, सीमा पार भुगतान व्यवस्था को बेहतर करने, राष्ट्रीय मुद्राओं के अधिक इस्तेमाल, छोटे और मझोले कारोबार के विकास, डिजिटल व्यापार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। इसके अलावा, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु संबंधी चुनौतियों से निपटने, विकास वित्त, न्यू डेवलपमेंट बैंक और वैश्विक वित्तीय व राजनीतिक संस्थानों में सुधार भी प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकते हैं।