बुलंद सोच, छिंदवाड़ा।
छिंदवाड़ा के धरमटेकड़ी चौकी क्षेत्र में रेबीज संक्रमण से जूझ रही 45 वर्षीय महिला ने असहनीय परेशानी के बीच खुद को गंभीर रूप से घायल कर लिया। बुधवार को महिला ने अपने गले और हाथ की नस काट ली थी।
खून से लथपथ हालत में उसे जिला अस्पताल लाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। महिला की मौत के बाद अस्पताल में उस समय हड़कंप मच गया, जब डॉक्टरों को पता चला कि महिला लंबे समय से रेबीज संक्रमित थी।
सबसे गंभीर बात यह रही कि महिला को अस्पताल लाने वाले परिजनों ने डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को उसके रेबीज संक्रमित होने की जानकारी नहीं दी थी। ऐसे में इमरजेंसी में महिला के इलाज के दौरान डॉक्टर और कर्मचारी उसके संपर्क में आए।
एहतियाती कदम और जांच
संक्रमण की जानकारी सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने तत्काल एहतियाती कदम उठाते हुए संपर्क में आए डॉक्टरों, कर्मचारियों और परिजनों को रेबीज से बचाव के इंजेक्शन लगवाए।
महिला के गले और हाथ की नस कटने से काफी खून बह रहा था और उसे इमरजेंसी के ड्रेसिंग रूम में ले जाकर उपचार दिया गया था। रेबीज संक्रमण की जानकारी मिलने के बाद गुरुवार को अस्पताल प्रबंधन ने ड्रेसिंग रूम को दवाओं का स्प्रे कर सैनिटाइज कराया।
अस्पताल प्रबंधन ने संक्रमण के संभावित खतरे को देखते हुए अन्य मरीजों और स्टाफ की सुरक्षा के लिए आवश्यक सावधानी बरती।
धरमटेकड़ी चौकी प्रभारी दिनेश बघेल ने बताया कि महिला की मौत के मामले में मर्ग कायम कर जांच की जा रही है। रेबीज संक्रमण की पुष्टि होने के बाद प्रोटोकॉल के तहत महिला का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया।
पुलिस की प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि महिला रेबीज संक्रमण से परेशान थी और इसी परेशानी के चलते उसने खुद को घायल किया। पुलिस मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।
संक्रमण का कारण और लापरवाही
जिला अस्पताल के आरएमओ डॉ. हर्षवर्धन कुड़ापे के अनुसार, प्राथमिक पूछताछ में पता चला है कि करीब तीन महीने पहले महिला एक स्ट्रीट डॉग को अपने घर लेकर आई थी और इसी दौरान कुत्ते ने महिला को काट लिया था।
कुछ दिन बाद कुत्ते की मौत हो गई, लेकिन महिला ने कुत्ते के काटने को गंभीरता से नहीं लिया और रेबीज से बचाव के लिए वैक्सीन नहीं लगवाई। कुछ समय बाद उसमें रेबीज के लक्षण दिखाई देने लगे।
संक्रमण बढ़ने पर वह पानी और हवा से डरने लगी थी। परिजन उसका इलाज कराने नागपुर भी ले गए थे, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ।
परिजनों की चुप्पी ने पुलिस और अस्पताल प्रबंधन के सामने एक अहम सवाल खड़ा किया है कि महिला को अस्पताल लाते समय डॉक्टरों को उसके रेबीज संक्रमित होने की जानकारी क्यों नहीं दी गई।
यदि संक्रमण की जानकारी पहले मिल जाती तो डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ महिला के उपचार के दौरान जरूरी सावधानियां बरत सकते थे। हालांकि, परिजनों से संपर्क कर जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने घटना के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी।
करीब तीन महीने पहले कुत्ते के काटने के बाद यदि महिला ने समय पर रेबीज रोधी उपचार कराया होता तो शायद स्थिति यहां तक नहीं पहुंचती। धीरे-धीरे संक्रमण बढ़ा और बीमारी ने उसकी जिंदगी छीन ली।

