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2026-08-10

दतिया उपचुनाव परिणाम: दो दिग्गज नेताओं के राजनीतिक भविष्य पर प्रश्न चिन्ह

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच।

दतिया उपचुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस और भाजपा दोनों के एक-एक दिग्गज नेता के भविष्य पर प्रश्न चिन्ह लग गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा की आगे की राजनीति को लेकर सियासी हलकों में चर्चाएं तेज हैं। चर्चाओं के अनुसार, नरोत्तम मिश्रा खुद शांत रहने वाले हैं; वहीं, यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करने पर विचार कर रही है। इधर, कांग्रेस ने मतगणना से ठीक एक दिन पहले पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को निष्कासित कर दिया। पार्टी के इस कदम से यह संदेश गया कि अब पार्टी को राजेंद्र भारती की आवश्यकता नहीं है, जिससे उनके राजनीतिक भविष्य पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

दिल्ली में बढ़ी राजनीतिक हलचलें

दतिया उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद दिल्ली में राजनीतिक हलचलें बढ़ गई हैं। प्रधानमंत्री ने इस हार के बाद केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को बुलाकर उनसे फीडबैक लिया। मध्य प्रदेश के भाजपा नेता एवं वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की बुधवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात हुई, जिसके बाद सियासी अटकलों का बाजार गर्म हो गया। इससे कुछ दिन पहले पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा ने भी अमित शाह से मुलाकात की थी। इसके बाद गुरुवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दिल्ली पहुंचे। जानकारों का मानना है कि बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव और मध्य प्रदेश के दतिया उपचुनाव की हार की चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर कम हो रही है। हालांकि, मध्य प्रदेश के सियासी हलकों में कई तरह की चर्चाओं का दौर जारी है।

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वन विकास निगम का आर्थिक संकट

मध्य प्रदेश वन विकास निगम इन दिनों आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। इस स्थिति के कारण कोई भी पीसीसीएफ (प्रधान मुख्य वन संरक्षक) स्तर का अधिकारी निगम का प्रबंध निदेशक (एमडी) नहीं बनना चाहता है। वन बल प्रमुख ने निगम के एमडी पद के लिए मुख्यालय से जिन पीसीसीएफ अधिकारियों के नाम राज्य सरकार के मंत्रालय को भेजे हैं, उनमें समिता राजौरा, मनोज अग्रवाल और बीएस अन्नागिरी शामिल हैं। ये सभी अधिकारी वन मुख्यालय में बड़े बजट वाली महत्वपूर्ण शाखाओं के प्रमुख हैं और बताया गया है कि वे वहां से हटना नहीं चाहते हैं। ये सभी अधिकारी निगम के एमडी नहीं बनने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं, जिनमें मंत्रियों का सहारा लेना और मुख्य सचिव से संबंधों का लाभ उठाने की कोशिशें शामिल हैं। वर्तमान में, निगम के एमडी का प्रभार सीसीएफ (मुख्य वन संरक्षक) को सौंपा गया है, क्योंकि एचयू खान के 31 जुलाई को सेवानिवृत्त होने के बाद से यह पद खाली है।

इंदौर महापौर का कार्यकाल आकलन

इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने अपना चार साल का कार्यकाल पूरा होने पर वरिष्ठ संपादकों से मुलाकात की। इस दौरान उनके द्वारा दिए गए प्रेजेंटेशन से यह स्पष्ट हुआ कि इंदौर ने अनेक क्षेत्रों में उपलब्धियां हासिल की हैं, साथ ही कई कार्य वर्ष 2047 की दीर्घकालिक दृष्टि से शुरू किए गए हैं। चर्चा के दौरान महापौर भार्गव ने कहा कि उनके चार साल के कार्यकाल को इंदौर के ‘रिवाइवल’ के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाला समय बताएगा कि उनके द्वारा किए गए काम इंदौर की भविष्य की जनसंख्या को देखते हुए कितने उपयोगी साबित होंगे। वर्तमान में इंदौर में करीब 23 फ्लाईओवर, ओवरब्रिज और 22 मास्टर प्लान सड़कों का निर्माण चल रहा है, जिसके कारण नागरिकों को कभी-कभी परेशानी का सामना करना पड़ता है। महापौर ने स्वीकार किया कि फिलहाल तकलीफ जरूर है, लेकिन इसका फायदा आने वाले समय में नजर आएगा। उन्होंने बताया कि अमृत 2.0 योजना लगभग 50 लाख की आबादी को जलप्रदाय के लिए बनाई गई है। इंदौर नगर निगम ग्रीन बांड जारी करने वाला देश का पहला निगम है और ब्लू बांड भी जारी करने की योजना है।

बड़वानी में पंचायत भवनों का आधुनिकीकरण

मध्य प्रदेश में बड़वानी पहला आदिवासी जिला बन गया है, जहां पंचायत भवनों को नए सिरे से तैयार कर उनका आधुनिकीकरण किया गया है। जिला पंचायत बड़वानी ने ‘नवाचार–क्रियाशील ग्राम पंचायत भवन’ अभियान के तहत ग्रामीण सुशासन और नागरिक सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में कार्य किया है। इस अभियान के तहत जिले के 409 ग्राम पंचायत भवनों में से 201 का शत-प्रतिशत आधुनिकीकरण पूरा कर लिया गया है। यह कार्य जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी काजल जावला की पहल से संपन्न हुआ। अभियान के अंतर्गत जर्जर पंचायत भवनों का कायाकल्प, आधुनिक कार्यालयों का निर्माण, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा, बेहतर बैठक कक्ष, ‘आदि सेवा केंद्र’ और कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से एक ही स्थान पर सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि अब कई सरकारी सेवाएं पंचायत स्तर पर ही उपलब्ध होने लगी हैं, जिससे उन्हें ब्लॉक या जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ते हैं।