बुलंद सोच, जबलपुर।

धनुष तोप अब सिर्फ स्वदेशी नहीं, बल्कि और अधिक घातक बनने की राह पर है। यह उन्नयन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में सटीक लक्ष्य भेदने और दुश्मन के ठिकानों को तबाह करने में मिली सफलता के बाद किया जा रहा है।
जबलपुर स्थित गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) धनुष के आधुनिक संस्करण की पहली खेप में 12 तोपें तैयार कर रही है। सेना को कुल 62 आधुनिक तोपें देने का लक्ष्य है, जो कई खेप में उपलब्ध कराई जाएंगी।
नए धनुष की सबसे बड़ी विशेषता इसकी मारक क्षमता में वृद्धि होगी। इसकी रेंज 38 किलोमीटर से बढ़ाकर 44 से 46 किलोमीटर तक की जाएगी, जबकि यह 45 कैलिबर की जगह अब 52 कैलिबर में नजर आएगी।
धनुष तोप को चर्चित बोफोर्स का उन्नत संस्करण माना जाता है। जीसीएफ 2010 के बाद से इसमें लगातार काम करती आई है, और समय-समय पर इसमें हुए तकनीकी बदलावों ने इसे आज सबसे शक्तिशाली आधुनिक तोप बना दिया है।
इस उन्नयन की खास बात केवल मारक क्षमता नहीं, बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता भी है। धनुष में अब तक इस्तेमाल होने वाली इजराइल निर्मित चिप की जगह भेल की निर्मित चिप का उपयोग किया जाएगा।
नई प्रणाली में उन्नत रेडियो फ्रिक्वेंसी और एक्टिव रडार चिप्स, डिजिटल फायर कंट्रोल, रडार-लिंक्ड सेंसिंग, जीपीएस आधारित ऑटो-लेइंग और ऑनबोर्ड बैलिस्टिक कंप्यूटर जैसी तकनीकें शामिल होंगी।
पहाड़ी युद्धक्षेत्रों के लिए माउंटेन गन सिस्टम इसे और उपयोगी बनाएगा। धनुष का यह नया संस्करण दूरी, सटीकता, तकनीक और स्वदेशीकरण, इन चारों मोर्चों पर नई धार लेकर आएगा।

