BREAKING NEWS

Latest News

जबलपुर में टी-सीरीज टैंक ओवरहाल परियोजना की आधारशिला, रक्षा उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि का दावा

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने जबलपुर में वाहन निर्माणी जबलपुर (वीएफजे) में टी-सीरीज टैंक के ओवरहाल प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी। यह ₹472 करोड़ की परियोजना टी-72 टैंकों के अपग्रेडेशन और आधुनिकीकरण पर केंद्रित है, जिससे सेना की मारक क्षमता बढ़ेगी। रक्षामंत्री ने बताया कि 2014 के ₹46,000 करोड़ की तुलना में वित्त वर्ष 2025-26 में घरेलू रक्षा उत्पादन ₹1.80 लाख करोड़ से अधिक हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने परियोजना को जबलपुर और प्रदेश के गौरव में वृद्धि करने वाला बताया। वीएफजे प्रति वर्ष 80 टैंकों का ओवरहाल करेगा।

धनुष तोप बनेगी और घातक, सेना को मिलेंगी 62 आधुनिक तोपें

जबलपुर स्थित गन कैरिज फैक्ट्री द्वारा निर्मित स्वदेशी धनुष तोप को और अधिक घातक बनाया जा रहा है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में सफलता के बाद, इसके आधुनिक संस्करण की पहली खेप में 12 तोपें तैयार की जा रही हैं, जबकि सेना को कुल 62 आधुनिक तोपें देने का लक्ष्य है। इसकी मारक क्षमता 38 से बढ़ाकर 44-46 किलोमीटर की जाएगी और यह 52 कैलिबर में होगी। तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ाते हुए इजराइली चिप्स की जगह भेल निर्मित चिप्स का उपयोग किया जाएगा, जिसमें उन्नत तकनीकें शामिल होंगी। यह दूरी, सटीकता, तकनीक और स्वदेशीकरण के मोर्चों पर भारतीय सेना की क्षमता बढ़ाएगी।

जबलपुर ओएफके स्वदेशी हाईटेक सैन्य साजो-सामान का प्रमुख उत्पादन केंद्र बनेगी

जबलपुर स्थित आर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया (ओएफके) भारतीय सेना के लिए स्वदेशी और अत्याधुनिक सैन्य साजो-सामान का एक प्रमुख उत्पादन केंद्र बनने जा रही है। ऑपरेशन सिंदूर में एल-70 एंटी एयरक्राफ्ट गन के प्रभावी प्रदर्शन के बाद यहां उत्पादन को नई गति दी जाएगी। इसमें 120, 220, 450 किलोग्राम और थाउजेंड पाउंडर बमों की नई खेप शामिल है। राफेल और जगुआर जैसे लड़ाकू विमानों के लिए 500 और 1000 किलोग्राम के स्वदेशी जनरल पर्पस एरियल बम, 250 किलोग्राम के बंकर-बख्तरबंद ध्वस्त करने वाले बम और 125 मिमी एफएसएपीडीएस टैंकभेदी गोला-बारूद भी तैयार होगा।

बोइंग डिफेंस इंडिया और मरलिनहॉक एयरोस्पेस ने P-8I विमानों के रखरखाव हेतु समझौता किया

बोइंग डिफेंस इंडिया और बंगलूरू की मरलिनहॉक एयरोस्पेस ने भारतीय सैन्य जहाजों और विमानों के रखरखाव के लिए एक समझौता किया है। इस साझेदारी से रक्षा उपकरणों की मरम्मत अब भारत में ही हो सकेगी, जिससे विदेशी निर्भरता कम होगी और समय की बचत होगी। मरलिनहॉक का बंगलूरू स्थित एल3हैरिस वेस्टकैम प्रमाणित केंद्र P-8I समुद्री निगरानी विमानों के इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड सिस्टम की मरम्मत करेगा। यह पहल भारतीय नौसेना को तत्काल सहायता प्रदान करेगी और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।