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2026-10-17

अभिजीत दीपके का डूसू चुनाव में धनबल के इस्तेमाल का आरोप

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, छत्रपति संभाजीनगर।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संयोजक अभिजीत दीपके ने डूसू चुनाव प्रचार में धनबल के इस्तेमाल का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रचार करने वाले लोग महंगी कारों से आते हैं। दीपके ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की हालिया जीत का जिक्र करते हुए यह आरोप लगाया। एबीवीपी ने शनिवार को हुए डूसू चुनाव में केंद्रीय पैनल के चार में से तीन पदों पर जीत दर्ज की। एबीवीपी ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पदों पर जीत हासिल की। कांग्रेस समर्थित नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) केंद्रीय पैनल की चारों सीटों में से कोई भी नहीं जीत सकी। यह चुनाव सीजेपी के नेतृत्व में हुए हालिया जेन जी प्रदर्शनों के बाद आयोजित हुआ था। डूसू चुनाव को लेकर पूछे गए सवाल पर दीपके ने कहा, “चुनाव में पैसे का असर होता है और कुछ नहीं।” उन्होंने आगे कहा कि “दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रचार करने वाले रॉल्स रॉयस से आते हैं, जिसकी कीमत करोड़ों रुपये है। वे ऑडी और बीएमडब्ल्यू से आते हैं। इसलिए वहां पैसे का असर होता है।”

संस्थानों में वैचारिक प्रभाव पर चिंता

भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा वैचारिक जुड़ाव रखने वाले लोगों को बढ़ावा देने के राहुल गांधी के दावे के बारे में पूछे जाने पर दीपके ने इसी तरह की चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “अमरावती में मैंने देखा कि कुलपति कुमुद शर्मा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से आती हैं।” कुमुद शर्मा वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की कुलपति हैं, जो अमरावती के पास स्थित है। दीपके ने दावा किया कि जब से वह कुलपति बनी हैं, 50 से अधिक छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब छात्र किसी मुद्दे को लेकर विरोध करते हैं तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाती है, लेकिन जब एबीवीपी किसी चीज का विरोध करती है या किसी गेट पर ताला लगाती है तो उसके खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं होती। दीपके के अनुसार, “विचारधारा का विरोध करने वाले दलित और आदिवासी छात्रों के खिलाफ मामले दर्ज किए जाते हैं।” उन्होंने इसे “संस्थानों यानी विश्वविद्यालयों को आरएसएस की शाखा बनाने का रोडमैप” बताया।

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एमपीएससी परीक्षा व्यवस्था पर सवाल

सीजेपी संस्थापक ने यह भी दावा किया कि छात्रों का शिक्षा व्यवस्था से भरोसा कम हो रहा है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) के अभ्यर्थी कई दिनों से एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। दीपके ने कहा कि छात्रों का परीक्षा व्यवस्था से भरोसा उठ गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब तक भीमनवार इस्तीफा नहीं देते, छात्र कैसे भरोसा रखें कि परीक्षाएं पारदर्शी तरीके से होंगी। दीपके ने घोषणा की कि सीजेपी जल्द ही एमपीएससी अभ्यर्थियों के साथ मिलकर “भीमनवार राजीनामा द्या” नामक ऑनलाइन अभियान शुरू करेगा। इस अभियान में छात्र बताएंगे कि भीमनवार कौन हैं, उनकी “उपलब्धियां” क्या हैं, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ उनका क्या संबंध है और उनके इस्तीफे की जरूरत क्यों है।

आईआईटी बॉम्बे छात्र की आत्महत्या पर टिप्पणी

पिछले सप्ताह आईआईटी बॉम्बे के एक छात्र की आत्महत्या के मामले पर दीपके ने कहा कि केवल नकल करते पकड़े जाने के कारण इसे सही नहीं ठहराया जा सकता। अधिकारियों के अनुसार, छात्र शुक्रवार शाम अपने हॉस्टल के कमरे में पंखे से लटका मिला था। इससे कुछ घंटे पहले उसे मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान कथित तौर पर मोबाइल फोन और चैटजीपीटी का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था। दीपके ने कहा, “आईआईटी बॉम्बे में आत्महत्या की घटना दुखद है। यह छात्रों के शिक्षा व्यवस्था से भरोसा खोने का नतीजा है।” उन्होंने कहा कि “बच्चे पिछड़े इलाकों के साथ-साथ बड़े शहरों में भी जान दे रहे हैं। वे इसलिए आत्महत्या कर रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उनका साथ देने वाला कोई नहीं है।” दीपके ने आगे कहा, “अगर वह नकल करते पकड़ा गया तो आत्महत्या को सही नहीं ठहराया जा सकता।” उन्होंने पूछा, “क्या हमने कभी किसी मंत्री को भ्रष्टाचार में पकड़े जाने के बाद आत्महत्या करते सुना है, या किसी ऐसे कारोबारी के बारे में सुना है जिसने बैंक को लूटा और भाग गया हो?” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि “यहां मानसिक स्वास्थ्य परामर्श ज्यादा जरूरी है। यह ऐसी गंभीर गलती नहीं थी कि आत्महत्या की जाए।”

सीजेपी के अन्य अभियान और टिप्पणियाँ

सीजेपी नेता ने कहा कि “आदिवासी स्कूल ठीक करो” अभियान जारी रहेगा और इसे देशभर में चलाया जाएगा। उन्होंने बताया, “मैंने महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों का दौरा किया है और गुजरात भी जाऊंगा, जिसके बारे में कोई मुझसे नहीं पूछ रहा है।” चुनाव आयोग द्वारा तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को फ्रीज करने के फैसले पर दीपके ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सत्तारूढ़ भाजपा में शामिल हो जाना चाहिए, विपक्षी दलों को भंग कर देना चाहिए और उनके चुनाव चिह्न भी फ्रीज कर देने चाहिए। दीपके ने तंज कसते हुए कहा, “एक पार्टी चुनाव लड़ेगी और एक पार्टी चुनाव जीतेगी।”