बुलंद सोच, ग्वालियर।

ग्वालियर-चंबल संभाग में लंबे समय से लागू डकैती अधिनियम को समाप्त करने की मांग को लेकर उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है। इस मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा मंगलवार को ग्वालियर पहुंचे। तन्खा ने कहा कि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की परिस्थितियां अब पहले जैसी नहीं हैं। उन्होंने इस क्षेत्र विशेष के लिए लागू डकैती अधिनियम की प्रासंगिकता पर पुनर्विचार किए जाने की आवश्यकता बताई। याचिका के माध्यम से इस कानून को समाप्त करने की मांग की गई है। तन्खा ने कहा कि जिस परिस्थिति में इस कानून का उद्देश्य निर्धारित किया गया था, समय के साथ उन हालात में बदलाव आया है। इसलिए वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इस कानून की आवश्यकता और उसके प्रभाव का परीक्षण होना चाहिए। यह विशेष कानून ग्वालियर-चंबल संभाग में डकैती और संगठित अपराध पर नियंत्रण के उद्देश्य से लागू किया गया था। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि वर्तमान समय में सामान्य आपराधिक कानूनों के तहत भी अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई की जा सकती है। इसी आधार पर डकैती अधिनियम को समाप्त करने की मांग उच्च न्यायालय के समक्ष रखी गई है। इस मामले में उच्च न्यायालय द्वारा याचिका पर सुनवाई की जाएगी।
डकैती अधिनियम को समझें
मध्य प्रदेश डकैती एवं व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम, 1981 एक विशेष कानून है, जिसे ऐसे क्षेत्रों में डकैती और अपहरण जैसे संगठित एवं गंभीर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए बनाया गया था। इसे सामान्य बोलचाल में डकैती अधिनियम भी कहा जाता है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य ऐसे अपराधियों पर कार्रवाई करना है जो डकैती, अपहरण या उनसे जुड़े अपराधों में सक्रिय हों और जिनके कारण किसी क्षेत्र में भय का वातावरण बना हो। इसके तहत कुछ मामलों में सामान्य आपराधिक कानून से अलग विशेष प्रावधान और कठोर प्रक्रिया लागू होती है। किसी आरोपित पर इस अधिनियम की धाराएं लगने का मतलब यह नहीं है कि वह अपराधी साबित हो गया। अपराध सिद्ध करना अभियोजन की जिम्मेदारी है और अंतिम निर्णय न्यायालय करता है।

