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एमपी हाई कोर्ट ने वक्फ बोर्ड पुनर्गठन की आधी रात की प्रक्रिया पर सवाल उठाए

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, विशेषकर रात एक बजे नोटशीट पर हस्ताक्षर किए जाने के दावे को लेकर। याचिकाकर्ता शोएब राजा खान ने 4 जुलाई, 2026 की अधिसूचना को चुनौती दी है, जिसमें 3 जुलाई को चार सदस्यों के इस्तीफे के बाद अगले ही दिन पूरे बोर्ड का पुनर्गठन कर दिया गया था। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने मुख्य सचिव सहित चार अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी, जिसमें न्यायालय यह जांच करेगा कि प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के अनुरूप थी या नहीं।

बिलौआ की प्रतिबंधित खदानों पर कड़ा सुरक्षा घेरा, कलेक्टर-एसएसपी ने संभाला मोर्चा

ग्वालियर के बिलौआ खनन क्षेत्र में उच्च न्यायालय के आदेश पर प्रतिबंधित खदानों की निगरानी के लिए कड़ा सुरक्षा घेरा स्थापित किया गया है। कलेक्टर रुचिका चौहान और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह ने रविवार को क्षेत्र का निरीक्षण कर अधिकारियों को अवैध उत्खनन और परिवहन रोकने के सख्त निर्देश दिए। आठ चेकिंग प्वाइंट और जांच दल तैनात किए गए हैं, जिनमें खनन, राजस्व और पुलिस विभाग के अधिकारी शामिल हैं। मामले की सुनवाई सोमवार को उच्च न्यायालय में होनी है, जिसने पहले ड्रोन सर्वे का आदेश दिया था। प्रशासन की सख्ती से यातायात और माल परिवहन में कमी आई है।

एफआईआर दर्ज न होने पर हाई कोर्ट सख्त, भोपाल पुलिस कमिश्नर को कार्रवाई के निर्देश

उच्च न्यायालय ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म और जबरन गर्भपात के आरोपों वाली शिकायत पर एफआईआर दर्ज न होने को गंभीरता से लिया है। न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने भोपाल पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिए हैं कि पीड़िता की शिकायत पर तीन दिन के भीतर विधि अनुसार कार्रवाई कर उचित निर्णय लिया जाए। पीड़िता ने कमला नगर थाने में राजपाल अहिरवार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी और आरोप लगाया था कि पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बजाय उसे हनी ट्रैप में फंसाने की धमकी दी। याचिका में तत्कालीन थाना प्रभारी सहित तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय और आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई है।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने जमानत रद्द करने की याचिका खारिज की, कहा- ठोस व असाधारण परिस्थितियाँ आवश्यक

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक आपराधिक प्रकरण में आरोपी को मिली जमानत को रद्द कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति आरके चौबे की एकलपीठ ने कहा कि जमानत देने और रद्द करने की प्रक्रियाएं भिन्न हैं तथा पूर्व में दी गई राहत वापस लेने के लिए अत्यंत ठोस और असाधारण परिस्थितियाँ आवश्यक होती हैं। नर्मदापुरम निवासी सचिन ठाकुर ने राकेश रघुवंशी की जमानत रद्द करने की मांग की थी। उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को उचित ठहराते हुए कहा कि मात्र आरोपों के आधार पर जमानत निरस्त नहीं की जा सकती।

केरल उच्च न्यायालय ने 14 वर्षीय सौतेली बेटी से दुष्कर्म के आरोपी की जमानत याचिका खारिज की

केरल उच्च न्यायालय ने अपनी 14 वर्षीय सौतेली बेटी से दुष्कर्म के आरोपी व्यक्ति की जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायालय ने कहा कि आरोपी ने बिना किसी दया के बार-बार पीड़िता का यौन उत्पीड़न किया, जिसके परिणामस्वरूप वह गर्भवती हो गई। मामले की डायरी से पता चला कि पश्चिम बंगाल के मूल निवासी आरोपी के खिलाफ आरोप गंभीर थे और यह जुर्म पूर्व नियोजित प्रतीत होता है। अभियोजन पक्ष ने बताया कि मां की अनुपस्थिति में यह कृत्य हुआ। अदालत ने अपराध की प्रकृति और गंभीरता को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 17 साल बाद दो भाइयों की उम्रकैद की सजा रद्द की, पुलिस जांच पर सवाल

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने दमोह के 2009 के हत्या मामले में पुलिस जांच और अभियोजन के साक्ष्यों पर गंभीर सवाल उठाते हुए दो भाइयों, तुलसीराम राजपाल और हरप्रसाद, की उम्रकैद की सजा रद्द कर उन्हें बरी कर दिया। जिला अदालत ने 29 जून 2012 को उन्हें दोषी ठहराया था, जिसके बाद उन्होंने लगभग 17 साल जेल में बिताए। न्यायालय ने प्राथमिकी की विश्वसनीयता, कथित हत्यारे चाकू पर खून के निशान न होने, प्रत्यक्षदर्शियों के देरी से दर्ज बयानों और मृत्यु के समय को लेकर विरोधाभासी साक्ष्यों को आधार बनाया। न्यायालय ने कहा कि संदेहास्पद और विरोधाभासी साक्ष्यों पर दोषसिद्धि कायम नहीं रखी जा सकती।

विदिशा: बंधेरा गांव में नया हाई स्कूल खुला, 9वीं और 10वीं की कक्षाएं शुरू

विदिशा के बंधेरा गांव में एक नया हाई स्कूल खुल गया है, जिससे ककरुआ सहित तीन गांवों के बच्चों को अब जान जोखिम में डालकर बेतवा नदी के स्टॉप डैम के पिलरों को पार कर स्कूल नहीं जाना पड़ेगा। राज्य सरकार ने बंधेरा के मिडिल स्कूल को हाई स्कूल का दर्जा दिया है, और बुधवार से 9वीं तथा 10वीं की कक्षाएं शुरू हो जाएंगी। यह कदम बच्चों का स्टॉप डैम पार करते हुए एक वीडियो के इंटरनेट मीडिया पर वायरल होने के बाद उठाया गया। उच्च न्यायालय ने भी इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया है।

हाई कोर्ट ने कहा: विवादित वसीयत के आधार पर नामांतरण नहीं कर सकते राजस्व अधिकारी

हाई कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि विवादित वसीयत के आधार पर राजस्व अधिकारी भूमि का नामांतरण नहीं कर सकते। न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा की एकलपीठ ने बैतूल के एक मामले में यह आदेश दिया, जिसमें याचिकाकर्ताओं ने 1989 की कथित वसीयत पर नामांतरण का दावा किया था। प्रतिवादियों ने वसीयत को फर्जी बताते हुए चुनौती दी थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वसीयत की वैधता पर विवाद होने पर पक्षकारों को अपने अधिकारों की घोषणा के लिए सिविल कोर्ट जाना होगा, क्योंकि राजस्व अधिकारियों को ऐसे मामलों में फैसला करने का अधिकार नहीं है। बोर्ड आफ रेवेन्यू द्वारा पूर्व में पारित नामांतरण आदेशों को निरस्त करना उचित था।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने धर्म परिवर्तन कराने वालों को जेल भेजने की चेतावनी दी

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने झाबुआ में आदिवासी क्षेत्रों में धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश करने वाले संगठनों को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को जेल भेजा जाएगा और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि धार-झाबुआ में किसी भी मिशनरी को लोगों का धर्म परिवर्तन करने की इजाजत नहीं है। ‘मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2021’ के तहत 10 साल तक की जेल और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। कार्यक्रम में उन्होंने महिलाओं को 300 करोड़ रुपये के ऋण बांटे और 174 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की आधारशिला रखी।

तलाक के बाद पूर्व पति की संपत्ति पर पूर्व पत्नी का हक नहीं: MP हाई कोर्ट

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि तलाक के बाद पूर्व पत्नी को अपने पूर्व पति की संपत्ति या सेवा संबंधी लाभों पर दावा करने का अधिकार नहीं रहता। न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने अमरी बाई अहिरवार की रिट अपील खारिज कर दी। यह मामला दिवंगत कर्मचारी रामचरण अहिरवार के सेवानिवृत्ति लाभ और अनुकंपा नियुक्ति से जुड़ा था। खंडपीठ ने कहा कि विधिवत तलाक के बाद अपीलकर्ता का पूर्व पति की संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं है, और बेटी ही अनुकंपा नियुक्ति की हकदार होगी।