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जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे होंगे मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने गुजरात हाईकोर्ट के जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का नया मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की है। 31 अगस्त 2026 को हुई कॉलेजियम की बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसके बाद सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी जाएगी और मंजूरी मिलने पर अधिसूचना जारी होगी। जस्टिस कोगजे वर्तमान में गुजरात हाईकोर्ट में न्यायाधीश हैं, जिन्हें 2016 में अतिरिक्त और 2018 में स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। उनकी नियुक्ति से मध्यप्रदेश हाईकोर्ट को नया न्यायिक नेतृत्व मिलेगा।

ग्वालियर-चंबल डकैती अधिनियम समाप्त करने हाई कोर्ट में याचिका, विवेक तन्खा ने उठाए सवाल

ग्वालियर-चंबल संभाग में लंबे समय से लागू डकैती अधिनियम को समाप्त करने के लिए उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विवेक तन्खा ने ग्वालियर पहुंचकर इस कानून की प्रासंगिकता पर सवाल उठाए। उन्होंने तर्क दिया कि क्षेत्र की परिस्थितियां बदल गई हैं और अब इस विशेष कानून की आवश्यकता व प्रभाव का परीक्षण होना चाहिए। याचिकाकर्ताओं का मत है कि सामान्य आपराधिक कानूनों के तहत भी प्रभावी कार्रवाई संभव है। उच्च न्यायालय इस याचिका पर सुनवाई करेगा। यह अधिनियम 1981 में संगठित अपराधों पर नियंत्रण के लिए लागू किया गया था।

एमपी हाई कोर्ट से छतरपुर सीएमएचओ कर्मचारियों को अंतरिम राहत

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने छतरपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों को आउटसोर्सिंग की कार्रवाई के बीच अंतरिम राहत प्रदान की है। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने याचिकाकर्ताओं को फिलहाल सीएमएचओ कार्यालय में अपनी सेवाएं जारी रखने की अनुमति दी है। उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार सहित संबंधित पक्षों को चार सप्ताह में जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया है। चंद्रभान सेन व अन्य की ओर से दायर याचिका में सेवाओं को आउटसोर्स किए जाने को चुनौती दी गई थी।

न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे बने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के 30वें मुख्य न्यायाधिपति

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के नवनियुक्त 30वें मुख्य न्यायाधिपति न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे ने गुरुवार को पद और गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने भोपाल के लोकभवन स्थित सांदीपनि सभागार में उन्हें शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी उपस्थित थे, जिन्होंने राज्यपाल के साथ न्यायमूर्ति कोगजे को बधाई दी। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने राष्ट्रपति द्वारा जारी नियुक्ति अधिसूचना का वाचन किया। समारोह में विधानसभा अध्यक्ष, उपमुख्यमंत्रीगण, मंत्री, महापौर, न्यायिक अधिकारी, सांसद, विधायक और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

ग्वालियर में वेस्ट जोन रीजनल ज्यूडिशियरी कांफ्रेंस का समापन: न्यायिक शिक्षा के डिजिटल रूपांतरण पर मंथन

ग्वालियर में पहली बार आयोजित दो दिवसीय वेस्ट जोन रीजनल ज्यूडिशियरी कांफ्रेंस का समापन हुआ, जिसमें न्यायिक शिक्षा के डिजिटल रूपांतरण और संवेदनशील व समावेशी न्याय के निर्माण पर गहन मंथन हुआ। कर्नाटक, मध्य प्रदेश, गुजरात और उड़ीसा उच्च न्यायालयों के जस्टिस ने महत्वपूर्ण सत्रों को संबोधित किया। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ ग्वालियर के प्रशासनिक न्यायाधिपति जीएस अहलूवालिया ने धन्यवाद ज्ञापित किया। समापन अवसर पर बीएसएफ टेकनपुर के राष्ट्रीय श्वान प्रशिक्षण केंद्र द्वारा कृषि विश्वविद्यालय परिसर में एक आकर्षक डॉग शो का भी प्रदर्शन किया गया, जिसमें श्वानों ने हैरतअंगेज करतब दिखाए।

एमपी हाई कोर्ट ने वक्फ बोर्ड पुनर्गठन की आधी रात की प्रक्रिया पर सवाल उठाए

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, विशेषकर रात एक बजे नोटशीट पर हस्ताक्षर किए जाने के दावे को लेकर। याचिकाकर्ता शोएब राजा खान ने 4 जुलाई, 2026 की अधिसूचना को चुनौती दी है, जिसमें 3 जुलाई को चार सदस्यों के इस्तीफे के बाद अगले ही दिन पूरे बोर्ड का पुनर्गठन कर दिया गया था। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने मुख्य सचिव सहित चार अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी, जिसमें न्यायालय यह जांच करेगा कि प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के अनुरूप थी या नहीं।

बिलौआ की प्रतिबंधित खदानों पर कड़ा सुरक्षा घेरा, कलेक्टर-एसएसपी ने संभाला मोर्चा

ग्वालियर के बिलौआ खनन क्षेत्र में उच्च न्यायालय के आदेश पर प्रतिबंधित खदानों की निगरानी के लिए कड़ा सुरक्षा घेरा स्थापित किया गया है। कलेक्टर रुचिका चौहान और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह ने रविवार को क्षेत्र का निरीक्षण कर अधिकारियों को अवैध उत्खनन और परिवहन रोकने के सख्त निर्देश दिए। आठ चेकिंग प्वाइंट और जांच दल तैनात किए गए हैं, जिनमें खनन, राजस्व और पुलिस विभाग के अधिकारी शामिल हैं। मामले की सुनवाई सोमवार को उच्च न्यायालय में होनी है, जिसने पहले ड्रोन सर्वे का आदेश दिया था। प्रशासन की सख्ती से यातायात और माल परिवहन में कमी आई है।

एफआईआर दर्ज न होने पर हाई कोर्ट सख्त, भोपाल पुलिस कमिश्नर को कार्रवाई के निर्देश

उच्च न्यायालय ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म और जबरन गर्भपात के आरोपों वाली शिकायत पर एफआईआर दर्ज न होने को गंभीरता से लिया है। न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने भोपाल पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिए हैं कि पीड़िता की शिकायत पर तीन दिन के भीतर विधि अनुसार कार्रवाई कर उचित निर्णय लिया जाए। पीड़िता ने कमला नगर थाने में राजपाल अहिरवार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी और आरोप लगाया था कि पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बजाय उसे हनी ट्रैप में फंसाने की धमकी दी। याचिका में तत्कालीन थाना प्रभारी सहित तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय और आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई है।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने जमानत रद्द करने की याचिका खारिज की, कहा- ठोस व असाधारण परिस्थितियाँ आवश्यक

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक आपराधिक प्रकरण में आरोपी को मिली जमानत को रद्द कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति आरके चौबे की एकलपीठ ने कहा कि जमानत देने और रद्द करने की प्रक्रियाएं भिन्न हैं तथा पूर्व में दी गई राहत वापस लेने के लिए अत्यंत ठोस और असाधारण परिस्थितियाँ आवश्यक होती हैं। नर्मदापुरम निवासी सचिन ठाकुर ने राकेश रघुवंशी की जमानत रद्द करने की मांग की थी। उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को उचित ठहराते हुए कहा कि मात्र आरोपों के आधार पर जमानत निरस्त नहीं की जा सकती।

केरल उच्च न्यायालय ने 14 वर्षीय सौतेली बेटी से दुष्कर्म के आरोपी की जमानत याचिका खारिज की

केरल उच्च न्यायालय ने अपनी 14 वर्षीय सौतेली बेटी से दुष्कर्म के आरोपी व्यक्ति की जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायालय ने कहा कि आरोपी ने बिना किसी दया के बार-बार पीड़िता का यौन उत्पीड़न किया, जिसके परिणामस्वरूप वह गर्भवती हो गई। मामले की डायरी से पता चला कि पश्चिम बंगाल के मूल निवासी आरोपी के खिलाफ आरोप गंभीर थे और यह जुर्म पूर्व नियोजित प्रतीत होता है। अभियोजन पक्ष ने बताया कि मां की अनुपस्थिति में यह कृत्य हुआ। अदालत ने अपराध की प्रकृति और गंभीरता को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।