बुलंद सोच, ग्वालियर।

शिवपुरी निवासी 40 वर्षीय अमित पिछले लगभग तीन दशकों से रुक-रुक कर होने वाली न्यूरोलॉजिकल समस्या से परेशान थे। मात्र 10 वर्ष की उम्र में उन्हें पहली बार शरीर के दाहिने हिस्से में अचानक कमजोरी (राइट हेमिपेरेसिस) महसूस हुई थी। इसके एक वर्ष बाद 11 वर्ष की उम्र में उन्हें दोबारा इसी प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ा।
हाल ही में अचानक बेहोशी की स्थिति उत्पन्न होने पर परिजन उन्हें उपचार के लिए जेएएच न्यूरोलॉजी अस्पताल, ग्वालियर लेकर पहुंचे। अस्पताल में मरीज की विस्तृत न्यूरोलॉजिकल जांच और आवश्यक परीक्षण किए गए। जांच के दौरान मरीज में ‘मोयामोया’ डिजीज की पहचान हुई।
यह मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं से संबंधित एक दुर्लभ बीमारी है, जिसमें मस्तिष्क की प्रमुख रक्त वाहिकाओं में रक्त प्रवाह प्रभावित होने के कारण बार-बार स्ट्रोक, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी, बेहोशी या अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण हो सकते हैं। मरीज की स्थिति अत्यंत गंभीर होने के कारण उन्हें जीवन रक्षा के लिए वेंटिलेटर पर रखा गया। कुशल उपचार के फलस्वरूप मरीज को वेंटिलेटर से सफलतापूर्वक हटा लिया गया।
मरीज को सर्जरी का भी परामर्श दिया गया था, जिसके लिए परिवारजनों की तरफ से मना कर दिया गया। अतः मरीज का बिना सर्जरी के दवाओं द्वारा ही सफल उपचार किया गया। मरीज का उपचार डॉ. प्रोफेसर दिनेश उदैनिया, डॉ. अरविंद गुप्ता और डॉ. सौरभ सिंह राजपूत की देखरेख में किया गया। चिकित्सकों और मेडिकल टीम द्वारा मरीज की स्थिति की लगातार निगरानी करते हुए आवश्यक उपचार प्रदान किया गया। उपचार के बाद मरीज की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ और वर्तमान में उनकी हालत स्थिर है।

