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2026-10-17

इंदौर में मतदाता सूची से कटे 4.47 लाख नाम फिर खोजे जाएंगे

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, इंदौर।

इंदौर जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से बाहर हुए चार लाख 47 हजार 123 मतदाताओं को फिर से खोजा जाएगा। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर ऐसे मतदाताओं को सूची में वापस जोड़ने के लिए एक अभियान चलाया जाएगा। जिले के 3226 बूथों पर बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) इन मतदाताओं तक पहुंचेंगे और उनका सत्यापन करेंगे। सत्यापन में पात्र पाए जाने वाले मतदाताओं के नाम दोबारा मतदाता सूची में जोड़े जाएंगे।

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मतदाता संख्या में बदलाव

वर्ष 2025 अक्टूबर माह से एसआईआर की प्रक्रिया शुरू होने से पहले जिले में 28 लाख 67 हजार 294 मतदाता थे। एसआईआर के दौरान चार लाख 47 हजार 123 मतदाताओं के फार्म भरकर नहीं आए, जिसका अर्थ है कि उनके नाम प्रारंभिक सूची में नहीं थे। 23 दिसंबर 2025 को प्रकाशित प्रारंभिक मतदाता सूची में मतदाता संख्या घटकर 24 लाख 20 हजार 171 रह गई। एसआईआर के दौरान 66,825 मतदाताओं के नाम जोड़े गए। 21 फरवरी 2026 को अंतिम प्रकाशन में मतदाता संख्या 24 लाख 86 हजार 996 पहुंची। इसके बाद से अब तक जिले में 15,567 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल किए गए हैं। वर्तमान में जिले में 25 लाख दो हजार 563 मतदाता हैं।

अभियान का क्रियान्वयन

नए अभियान में एसआईआर के दौरान हटाए गए मतदाताओं को केंद्र में रखा जाएगा। जिले के 3226 बूथों पर बीएलओ इन मतदाताओं की जानकारी के आधार पर उनसे संपर्क करेंगे। पात्र पाए जाने वाले मतदाताओं के नाम जोड़ने के बाद दावे-आपत्तियां भी बुलाई जाएंगी। आपत्तियों का निराकरण करने के बाद नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाएंगे।

सर्वाधिक प्रभावित विधानसभा क्षेत्र

एसआईआर के प्रारंभिक प्रकाशन में सबसे ज्यादा कमी इंदौर-5 में दर्ज की गई, जहां 87,591 मतदाता कम हुए। इसके बाद इंदौर-1 में 75,014 और इंदौर-2 में 72,969 मतदाताओं की संख्या घटी। वहीं, सांवेर में 24,811 और महू में 27,673 मतदाताओं की कमी दर्ज हुई। अब इन्हीं हटाए गए नामों में से पात्र मतदाताओं को खोजकर सूची में वापस लाने की प्रक्रिया होगी।

प्रक्रियात्मक प्रावधान

विभिन्न कारणों से विलोपित किए गए मतदाताओं का नाम जोड़ने का एक और अवसर दिया जा रहा है। परिवर्तन वाले मतदान केंद्र, पुरानी और वर्तमान सूचियों के मिलान से तैयार सूची के आधार पर इनकी जांच की जाएगी। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि फार्म-6 के साथ लगाई जाने वाली घोषणा में 2003 की जानकारी देना अनिवार्य नहीं होगा। गैर-एसआईआर अवधि में निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1960 के तहत निर्धारित प्रपत्रों का ही उपयोग होगा।