युवा कांग्रेस ने मंडी में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका। हिसार में किराना दुकानदार से तीन लाख की रंगदारी मांगी गई और मना करने पर हमला किया गया। कन्नौज में लखीमपुर खीरी घटना के विरोध में पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की मांग उठी। बिलासपुर में राष्ट्रपति के दौरे की तैयारियां तेज हुईं और ग्रामीण बाजारों में कचरा उठाने का नया शेड्यूल तय हुआ। भदोही के रमेश पहलवान ने प्रयागराज के दुर्गेश पहलवान को हराया। जालौन में किसान ने आत्महत्या की, युवा निषाद टीम ने बच्चों को पुस्तकें बांटीं और दो दिन तेज बारिश की संभावना है।
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और एसआईआर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन में सरकार की भूमिका तथा आयोग के निर्णयों में बहुमत प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न लगाया। ओवैसी ने एसआईआर को बैकडोर एनआरसी बताया और परिवार रजिस्टर व ऑनलाइन प्रक्रिया की व्यवहार्यता पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आयोग से बहुमत से लिए गए फैसलों का ब्योरा मांगा और कहा कि दो सदस्यों के असहमति नोट से निर्णयों की वैधता पर सवाल उठता है। उन्होंने एसआईआर के कारण गरीबों पर पड़े बोझ और अंतिम सूची से बाहर हुए लोगों के भविष्य को लेकर भी सरकार से स्पष्टीकरण मांगा।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चुनाव आयोग और ईवीएम को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल किया कि कांग्रेस के जीतने पर चुनाव आयोग ठीक और हारने पर खराब कैसे हो जाता है। चौहान ने मतपत्र से चुनाव की मांग को देश को 80-90 के दशक में ले जाने की कोशिश बताया। उन्होंने कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल में कांग्रेस की जीत का हवाला देते हुए कहा कि हारने के बाद जनादेश का अपमान करना और संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना कांग्रेस की पुरानी आदत है। चौहान ने कांग्रेस पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया।
सुप्रीम कोर्ट सोमवार, 5 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के निलंबन और उनके कथित तौर पर अकेले लिए गए फैसलों को रद्द करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि कुछ फैसले और बदलाव दो अन्य निर्वाचन आयुक्तों की सहमति के बिना किए गए, जबकि कानून में बहुमत के फैसले का प्रावधान है। इसमें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और फॉर्म 6 में सॉफ्टवेयर द्वारा जोड़े गए बदलावों को चुनौती दी गई है। चुनाव आयोग ने विचारों में अंतर को सामान्य बताया है।
इंदौर जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से बाहर हुए 4,47,123 मतदाताओं को भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर फिर से खोजा जाएगा। जिले के 3226 बूथों पर बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) इन मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। पात्र पाए जाने वाले नामों को दोबारा मतदाता सूची में जोड़ा जाएगा। एसआईआर से पहले 28,67,294 मतदाता थे, जो प्रारंभिक सूची में 24,20,171 रह गए थे। वर्तमान में जिले में 25,02,563 मतदाता हैं। इस अभियान में दावे-आपत्तियां भी बुलाई जाएंगी।
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के दौरान फर्जी फॉर्म-7 दाखिल कर मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप लगाया है। उन्होंने चुनाव आयोग से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। ओवैसी ने चेतावनी दी कि अगर यह “नाटक” बंद नहीं हुआ, तो हैदराबाद में बड़े विरोध प्रदर्शन होंगे। उन्होंने भाजपा और संघ परिवार पर फॉर्म-7 के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया, जिसमें फॉर्म भरने वाले की जानकारी के बिना मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की जा रही है। ओवैसी ने एसआईआर को “पिछले दरवाजे से लाया गया एनआरसी” भी बताया और कहा कि उनकी पार्टी ने इसका शुरू से विरोध किया है।
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर युवाओं ने ‘Gen Z प्रोटेस्ट 2.0’ के तहत अनिश्चितकालीन प्रदर्शन शुरू किया है। सोमवार को टंट्या भील चौराहे पर बड़ी संख्या में युवा एकत्रित हुए और देर रात तक नारेबाजी की। यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते। प्रदर्शनकारियों को स्थानीय समाजसेवियों, जैसे प्रहलाद पांडे, का भी समर्थन मिल रहा है। युवाओं ने भारत का संविधान और महात्मा गांधी की तस्वीरें लेकर तीखे संदेश वाली तख्तियां प्रदर्शित कीं। देश के अन्य शहरों में भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन हुए हैं।
दतिया विधानसभा उपचुनाव में नवनिर्वाचित कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह ने ग्वालियर रेंज के डीआईजी असित यादव और जिला पंचायत दतिया के सीईओ अक्षय तेम्रवाल पर चुनाव प्रभावित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। विधायक ने कहा कि डीआईजी यादव को चुनाव के दौरान विशेष व्यवस्था करने की खुली छूट दी गई थी और 15-20 बूथों पर मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया गया। हालांकि, दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े और एसपी मयूर खंडेलवाल ने निष्पक्षता से चुनाव कराया और अवैध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी। विधायक ने नए थाना प्रभारियों और टीआई पर भाजपा प्रत्याशी के समर्थक होने का भी आरोप लगाया।
हाई कोर्ट ने सुरखी (सागर) से भाजपा विधायक व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में राजपूत ने नामांकन के साथ प्रस्तुत शपथपत्र में अपनी और अपनी पत्नी की संपत्तियों की जानकारी छिपाई थी। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद संपत्ति छिपाने के आरोपों की समीक्षा का वैधानिक अधिकार निर्वाचन आयोग के पास नहीं रहता।
दतिया उपचुनाव की मतगणना से पहले कांग्रेस से निष्कासित पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने कई राजनीतिक दावे किए। उन्होंने नवनिर्वाचित विधायक घनश्याम सिंह पर भाजपा नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा के “रिमोट कंट्रोल” पर काम करने का आरोप लगाया। भारती ने यह भी दावा किया कि उन्हें घनश्याम सिंह की विधानसभा सदस्यता बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट से स्टे दिलाने का प्रस्ताव मिला था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया। भारती ने अपने निष्कासन को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन बताया और कहा कि यह फैसला दबाव में लिया गया।