बुलंद सोच, इंदौर।

इंदौर में सिंहस्थ के लिए बनने वाले सरकारी लक्जरी होटल की जमीन के हक में उलझन बनी हुई है, जबकि सिंहस्थ में डेढ़ साल बचा है। होटल के लिए पर्यटन विकास निगम (एमपीटी) को कृषि कॉलेज के सामने जमीन आवंटित की गई है। इसी जमीन पर एआईसीटीएसएल का बस डिपो भी स्थित है। एमपीटी ने एआईसीटीएसएल और परिवहन विभाग को जमीन खाली करने के लिए नोटिस जारी किया है। एआईसीटीएसएल का कहना है कि प्रशासन ने यह जमीन उन्हें डिपो के लिए दी थी। वर्तमान में यहां एआईसीटीएसएल की खराब बसें खड़ी हैं।
पर्यटन विभाग की योजना
पर्यटन निगम ने होटल के लिए परियोजना तैयार कर ली है। निगम का कहना है कि जमीन हाथ में आते ही निर्माण एजेंसी के लिए टेंडर जारी किए जाएंगे। विभाग का प्रयास है कि होटल का निर्माण सिंहस्थ से पहले पूरा हो जाए। पर्यटन विकास निगम ने होटल के लिए पीपीपी (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) या रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल तैयार किया है। प्रशासन ने मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग को होटल के लिए जमीन का आवंटन 2015-16 में कर दिया था। आवंटित जमीन के एक हिस्से पर निगम ने अपना कार्यालय बना लिया था, लेकिन होटल निर्माण का मामला बार-बार टलता रहा। मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. इलैया राजा ने बताया कि हमने एआईसीटीएसएल से जमीन मांगी है और जमीन देने के लिए कहा है, साथ ही परिवहन विभाग के अधिकारियों से भी चर्चा की जा रही है।
एआईसीटीएसएल का पक्ष और घटनाक्रम
पर्यटन निगम को होटल के लिए दी गई जमीन लंबे समय तक खाली रहने के कारण एआईसीटीएसएल ने सूत्र सेवा व सिटी बसों को खड़ा करने के लिए जगह मांगी थी। इसीलिए उन्हें अनुमति दी गई थी और समय के साथ इसे एक स्थाई डिपो की तरह विकसित कर लिया गया। इसी बीच, 2019 में पर्यटन विकास निगम ने होटल बनाने के लिए फिर से जमीन मांगी, कुछ दिन प्रयास किए गए लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया। 2021-22 में भी एआईसीटीएसएल को पत्र लिखा गया था, लेकिन कोरोना के कारण मामला टल गया। एआईसीटीएसएल पहले नगर निगम की इकाई थी, लेकिन अब यह परिवहन विभाग द्वारा शुरू की गई मुख्यमंत्री सुगम बस सेवा की सहयोगी कंपनी बन गई है। इस सेवा के लिए परिवहन विभाग भी बस स्टैंड और डिपो का निर्माण कर रहा है, ऐसे में कंपनी चाहती है कि यह जमीन उन्हें मिल जाए ताकि यहां डिपो या बसों के लिए सुविधा बनाई जा सके। जब से पर्यटन निगम ने जमीन वापस देने के लिए नोटिस दिया है, दोनों विभाग आमने-सामने आ गए हैं। एआईसीटीएसएल के कार्यकारी अधिकारी अर्थ जैन ने बताया कि पत्राचार चल रहा है और जमीन संबंधी जानकारी राजस्व विभाग से मांगी गई है।

