बैतूल जिला अस्पताल में 84.98 लाख रुपये की लागत से निर्मित 30 बिस्तरों का विश्रामालय लोकार्पण के तीन माह बाद भी बंद है। मई में जनप्रतिनिधियों द्वारा लोकार्पित यह भवन मरीजों के स्वजन के लिए बनाया गया था, लेकिन संचालन प्रक्रिया स्पष्ट न होने के कारण इसका उपयोग शुरू नहीं हो पाया है। दूरदराज से आने वाले मरीजों के परिजन ठहरने की समस्या से जूझ रहे हैं और अस्पताल के बरामदों या फर्श पर रात बिताने को मजबूर हैं। आरएमओ डॉ. रानू वर्मा के अनुसार, संचालन के दिशा-निर्देशों का इंतजार है और कलेक्टर से मार्गदर्शन मांगा गया है।
मध्य प्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (एमपी-यूडीसी) ने सूरत की इंजीनियरिंग प्रोफेशनल कंपनी प्रा.लि. को जाली बैंक गारंटी के आधार पर 6.57 करोड़ रुपये का ठेका दिया था। काम पूरा होने के बाद भौतिक सत्यापन में बैंक ऑफ इंडिया और आईसीआईसीआई बैंक द्वारा जारी की गई आठों बैंक गारंटी फर्जी पाई गईं। एमपी-यूडीसी के वित्त नियंत्रक सौरभ तिवारी ने भोपाल के एमपी नगर थाने में कंपनी के विरुद्ध धोखाधड़ी और जालसाजी की शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है, लेकिन कंपनी संचालकों के मोबाइल नंबर बंद मिले हैं।
भोपाल के हकीम सैयद जियाउल हसन यूनानी मेडिकल कॉलेज में देश का पहला अत्याधुनिक सरकारी हम्माम सेंटर बनाया जाना है। चार साल पहले घोषित यह प्रोजेक्ट लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की सुस्ती के कारण अटका है, जिसने अभी तक डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) कॉलेज प्रबंधन को नहीं सौंपी है। डीपीआर के अभाव में टेंडर और निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है, जिससे तीन करोड़ रुपये के शुरुआती बजट होने के बावजूद लागत बढ़ने की संभावना है। यह सेंटर यूनानी पद्धति से गंभीर बीमारियों के इलाज और बॉडी डिटाक्स के लिए विशेष होगा।
भोपाल स्मार्ट सिटी हाट बाजार, जो लगभग 50 करोड़ रुपये की लागत से टीटी नगर स्टेडियम के सामने बनाया गया था, चार वर्ष के भीतर ही निर्माण गुणवत्ता संबंधी समस्याओं से जूझ रहा है। तीन मंजिला भवन की दीवारों में दरारें आ गई हैं, पुताई उखड़ रही है और लिफ्टें बंद पड़ी हैं। परिसर शाम को शराबियों का अड्डा बन जाता है, और सफाई व्यवस्था भी बेहद खराब है, जिसके लिए मात्र एक कर्मचारी तैनात है। आवंटित दुकानदार और नए व्यापारी छोटी दुकानों, कम ग्राहक संख्या और ऊपरी मंजिलों पर ग्राहकों के न आने के कारण दुकानों में आने को तैयार नहीं हैं, जिससे अधिकांश दुकानें खाली पड़ी हैं।