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2026-10-17

देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी में नेट अनिवार्यता से पीएचडी की 75% सीटें खाली

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच।

देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी में पीएचडी के लिए ज्यादातर विषयों में नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (नेट) क्वालिफाई करने की अनिवार्यता का असर सीटों पर साफ दिख रहा है। जून में हुई नॉन डीईटी पीएचडी एडमिशन प्रक्रिया में 601 सीटों में से 451 सीटें खाली रह गईं, यानी करीब 75% सीटों पर अभ्यर्थी नहीं मिले। 150 सीटों पर ही एडमिशन हो पाया।

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कुछ विषयों में तो 90 से 95% तक सीटें खाली रह गईं।

यूनिवर्सिटी ने ढाई साल पहले शुरू की व्यवस्था के तहत 30 विषयों में नेट क्वालिफाई होने पर ही पीएचडी पात्रता का नियम लागू किया है।

इसके बाद से पीएचडी की प्रक्रिया हर छह माह में हो रही है, लेकिन स्कॉलर्स की संख्या कई गुना घट गई है।

जून की प्रक्रिया में 25 से ज्यादा विषयों में 234 गाइड के मार्गदर्शन में 601 सीटें थीं, जबकि नेट क्वालिफाई अभ्यर्थियों की संख्या 550 थी, इसके बावजूद 451 सीटें खाली रह गईं।

अब नवंबर-दिसंबर में फिर पीएचडी एडमिशन प्रक्रिया शुरू होगी।

मैनेजमेंट, कॉमर्स, कंप्यूटर साइंस सहित 17 विषयों में 50 से अधिक गाइड ऐसे हैं, जिनके पुराने स्कॉलर्स की पीएचडी पूरी हो चुकी है और अब उनके पास एक भी स्कॉलर नहीं है।

इसके विपरीत पॉलिटिकल साइंस में पीएचडी का जबरदस्त क्रेज है, जहां महज 1 सीट के लिए 170 दावेदार हैं। इस विषय में 25 नए गाइड की जरूरत है।

वहीं सोशियोलॉजी, लॉ, हिंदी जैसे विषयों में भी गाइड कम हैं और दावेदार काफी ज्यादा हैं।

जानकारों का कहना है कि क्वालिटी रिसर्च या स्कॉलर्स की संख्या, दोनों में से एक ही संभव हो पाएगा। उन्होंने डीएवीवी की प्रक्रिया को सही बताया।

पीएचडी सेल प्रभारी डॉ. अशेष तिवारी ने बताया कि क्वालिटी रिसर्च के लिए यूजीसी ने यह नियम लागू किया था और इसका पूरी तरह पालन हो रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सिर्फ इंजीनियरिंग के विषयों में, जिनमें नेट नहीं होती, प्रवेश परीक्षा ली जा रही है।