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2026-10-17

मध्य प्रदेश में मानसून सामान्य से 11.3% कम, 33.1 इंच बारिश; 21 सितंबर के बाद बढ़ेगी गतिविधि

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

मध्य प्रदेश में मानसून विदाई की ओर है। प्रदेश में अब तक औसतन 33.1 इंच बारिश दर्ज हुई है, जो सामान्य कोटे के 88.7 प्रतिशत है। सामान्य बारिश का आंकड़ा 37.3 इंच है, जिसे छूने के लिए अभी करीब 4.2 इंच पानी की और आवश्यकता है।
मानसून की आधिकारिक अवधि समाप्त होने में अब 13 दिन शेष हैं। मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार, इस बार मानसून के समय पर विदा होने की संभावना है, हालांकि इससे पहले बारिश का एक और दौर देखने को मिल सकता है।

आगामी बारिश का पूर्वानुमान

मौसम विभाग के मुताबिक, 20 सितंबर तक प्रदेश में किसी बड़े बारिश सिस्टम का असर नहीं रहेगा और भारी या अति भारी बारिश का कोई अलर्ट नहीं है।
प्रदेश के ऊपरी हिस्से से मानसून ट्रफ गुजर रही है, जबकि अरब सागर में कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय है। इन दोनों सिस्टम का प्रदेश पर फिलहाल बड़ा असर दिखाई नहीं दे रहा है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर बनने वाले सिस्टम से कुछ जिलों में तेज बारिश हो सकती है।
मौसम विभाग ने 21 सितंबर के बाद मौसम में बदलाव का अनुमान जताया है। चक्रवाती परिसंचरण और कम दबाव के क्षेत्र की गतिविधियां बढ़ सकती हैं, जिसका असर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश के रूप में दिखाई दे सकता है। सितंबर के आखिरी सप्ताह में इन गतिविधियों के चलते कुछ हिस्सों में तेज बारिश का दौर बनने का अनुमान है।

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हालिया बारिश और जिलों की स्थिति

पिछले 24 घंटे में दतिया के सेंवढ़ा में करीब 4 इंच और झाबुआ के शाहपुरा में 3 इंच बारिश दर्ज की गई। बुधवार शाम भोपाल, सीहोर समेत कई इलाकों में भी बारिश हुई।
प्रदेश के 32 जिलों में अभी भी सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे है।
बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडोरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढूर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में भी बारिश की कमी दर्ज है।
पश्चिमी हिस्से के कई जिलों में बारिश की कमी अधिक है। इनमें आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा शामिल हैं।
प्रदेश के 23 जिले ऐसे हैं, जहां सामान्य से अधिक बारिश दर्ज हुई है। इनमें अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी शामिल हैं।
पिछले सप्ताह हुई बारिश से पूर्वी हिस्से के आंकड़ों में सुधार हुआ था और कई इलाकों में तेज बारिश तथा बाढ़ जैसे हालात बनने से सीजन का घाटा कम हुआ था। हालांकि, बुधवार तक यह आंकड़ा फिर करीब 2 प्रतिशत कम हो गया।

बारिश की कमी का कारण

इस मानसून सीजन में जून में हुई कम बारिश अब भी भारी पड़ रही है। जून में प्रदेश में सामान्य से करीब 14 प्रतिशत कम पानी गिरा था।
जुलाई में अच्छी बारिश हुई और अगस्त में भी आंकड़े में सुधार आया। इस दौरान दो बार मानसून ब्रेक भी हुआ, जिससे कई दिनों तक बारिश नहीं हुई।
अगस्त के बाद सितंबर में हुई तेज बारिश से स्थिति में सुधार आया, लेकिन जून की कमी पूरी नहीं हो सकी। यही वजह है कि मानसून के अंतिम चरण में पहुंचने के बावजूद प्रदेश का कुल बारिश आंकड़ा अभी सामान्य से करीब 7 प्रतिशत नीचे बना हुआ है।

मानसूनी आंकड़ों की गणना

30 सितंबर के बाद होने वाली बारिश मानसून के आधिकारिक आंकड़ों में शामिल नहीं की जाती है। मानसूनी सीजन 1 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है।
इसलिए यदि अक्टूबर के शुरुआती दिनों में भी बारिश होती है, तो वह मानसून के सीजन के आंकड़े को नहीं बढ़ाएगी।

अन्य जानकारी

राजधानी के तालाबों पर एनजीटी की सख्ती है, जिसमें अतिक्रमण पर अफसरों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए गए हैं।