ग्वालियर अंचल में पिछले कुछ दिनों से सक्रिय मानसून प्रणाली में फिलहाल ठहराव आ गया है, जिससे आगामी चार दिनों तक कहीं-कहीं हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, 29 अगस्त के आसपास बंगाल की खाड़ी में एक नया निम्नदाब क्षेत्र बनने वाला है, जिससे पूर्वी और मध्य भारत में मानसून फिर सक्रिय हो सकता है। जिले में अब तक 595.3 मिमी औसत वर्षा हुई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 505.9 मिमी कम है। पिछले 24 घंटों में डबरा में 53 मिमी और ग्वालियर में 47.7 मिमी वर्षा दर्ज की गई।
मध्य प्रदेश में पूर्वोत्तर पर निम्न दबाव और ट्रफ लाइनों के कारण मानसूनी हलचल तेज हुई है। मौसम विभाग ने शुक्रवार के लिए दमोह और टीकमगढ़ में अत्यधिक भारी वर्षा का रेड अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही, रायसेन, गुना, ग्वालियर, सागर सहित 13 जिलों में अति भारी वर्षा का ऑरेंज अलर्ट और 17 जिलों में भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है। गुरुवार को नरसिंहपुर और नौगांव में सर्वाधिक 33 मिलीमीटर वर्षा हुई, जबकि भोपाल में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई। आगामी 24 घंटों में निम्न दबाव का क्षेत्र पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ेगा।
मध्य प्रदेश में अति भारी वर्षा के कारण शिवपुरी, मुरैना, भोपाल, रायसेन और सीहोर जैसे जिलों में जलजमाव की स्थिति बनी है। रायसेन में बेगमगंज-विदिशा मार्ग आठ घंटे बंद रहा, जबकि भोपाल में भदभदा और कलियासोत डैम के गेट खोले गए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को राज्य आपदा नियंत्रण कक्ष में बाढ़ और अतिवृष्टि से बने हालात की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को नागरिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और संकट में फंसे लोगों को अकेला न छोड़ने के निर्देश दिए।
ग्वालियर में रविवार को हुई झमाझम वर्षा से शहर और गांवों में जलभराव की स्थिति बनी। पिछले तीन दिन की वर्षा से जिले की नदियां उफान पर हैं और पही, ककेटा तथा तिघरा बांध लबालब भर गए, जिससे शहर का जल संकट हल हो गया। प्रशासन ने नदियों के किनारे बसे गांवों को बांधों से पानी छोड़े जाने की संभावना पर अलर्ट किया है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, निम्न दाब का क्षेत्र अब आगरा की ओर खिसक गया है, जिससे आगामी चार दिनों तक हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना है। वर्षा से तापमान सामान्य से पांच डिग्री सेल्सियस कम हुआ है और खरीफ व रबी फसलों को लाभ मिला है।
ग्वालियर में वर्षा का सिस्टम सक्रिय होने के बावजूद सोमवार को केवल बादल छाए रहे, जिससे अधिकतम तापमान में मामूली गिरावट दर्ज की गई और यह 32.5 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग ने 19 सितंबर से पश्चिमी राजस्थान से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की संभावना जताई है। शहर में हल्की वर्षा के आसार बने हुए हैं, जबकि अगले 24 घंटों के दौरान गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। वर्तमान में कम दबाव का क्षेत्र दक्षिण-पूर्वी राजस्थान और उत्तरी गुजरात पर केंद्रित है।
मध्य प्रदेश में मानसून विदाई की ओर है, जहां अब तक 33.1 इंच बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य कोटे से 11.3 प्रतिशत कम है। सामान्य आंकड़ा 37.3 इंच है, जिसके लिए 4.2 इंच अतिरिक्त बारिश की आवश्यकता है। मौसम विभाग के अनुसार, 20 सितंबर तक बड़े बारिश सिस्टम का असर नहीं रहेगा, लेकिन 21 सितंबर के बाद चक्रवाती गतिविधियों के कारण तेज बारिश का दौर बनने का अनुमान है। प्रदेश के 32 जिलों में अभी भी सामान्य से कम बारिश हुई है, जबकि 23 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। जून की कम बारिश को कुल कमी का मुख्य कारण बताया गया है।
इंदौर में बुधवार को दिनभर बादल छाए रहे और हल्की वर्षा दर्ज की गई। रीगल क्षेत्र में 20.25 मिमी और एयरपोर्ट क्षेत्र में 18.7 मिमी वर्षा रिकॉर्ड हुई। मौसम विज्ञानियों ने अगले तीन से चार दिनों तक इंदौर शहर और संभाग में रुक-रुककर हल्की वर्षा जारी रहने का अनुमान लगाया है। बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र और दक्षिण मध्य प्रदेश में सक्रिय शियर जोन इस मौसम परिवर्तन के मुख्य कारण हैं।
मध्य प्रदेश में तीन मौसम प्रणालियों के कारण अधिकांश जिलों में वर्षा जारी है। बुधवार को वर्षा में थोड़ी कमी देखी गई, हालांकि सीहोर में सर्वाधिक 43 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई। मौसम विभाग ने गुरुवार के लिए श्योपुर और शिवपुरी में भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया है। लगातार वर्षा से दिन के तापमान में गिरावट आई है। इस बीच, बुधवार को बंगाल की खाड़ी में एक नया निम्न दबाव क्षेत्र बन गया है, जिसका प्रभाव 15 अगस्त से राज्य में दिखेगा और तेज वर्षा का नया दौर शुरू होगा।
मध्य प्रदेश में इस वर्ष मानसून की स्थिति औसत से 19 प्रतिशत कम वर्षा के साथ बनी हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 20 प्रतिशत और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 18 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इंदौर संभाग के अधिकांश जिले, बुरहानपुर, खरगोन और देवास को छोड़कर, औसत से कम वर्षा से प्रभावित हैं। इंदौर जिले में औसत से 10 प्रतिशत और इंदौर शहर में 133.2 मिमी कम बारिश हुई है। वर्तमान में उत्तर-पूर्व मध्य प्रदेश पर एक कम दबाव का क्षेत्र और अन्य मौसम प्रणालियाँ सक्रिय हैं, जिससे पूर्वी मध्य प्रदेश में अच्छी बारिश हो रही है।
सागर जिले में अब तक सामान्य से 63 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जहां इस सीजन में कुल 455 मिमी (17.9 इंच) वर्षा हुई है, जबकि सामान्य बारिश 1230.5 मिमी है। पिछले 24 घंटों में बीना में पौने 4 इंच और राहतगढ़ में 3 इंच बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार, मध्य प्रदेश के ऊपर से गुजर रही ट्रफ लाइन और पश्चिम बंगाल पर बने निम्न दबाव क्षेत्र के कारण आगामी दिनों में तेज बारिश की संभावना है। पिछले साल 10 अगस्त तक 32.3 इंच बारिश हुई थी, जो इस वर्ष की तुलना में 44 प्रतिशत अधिक थी।