इंदौर में बुधवार को दिनभर बादल छाए रहे और हल्की वर्षा दर्ज की गई। रीगल क्षेत्र में 20.25 मिमी और एयरपोर्ट क्षेत्र में 18.7 मिमी वर्षा रिकॉर्ड हुई। मौसम विज्ञानियों ने अगले तीन से चार दिनों तक इंदौर शहर और संभाग में रुक-रुककर हल्की वर्षा जारी रहने का अनुमान लगाया है। बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र और दक्षिण मध्य प्रदेश में सक्रिय शियर जोन इस मौसम परिवर्तन के मुख्य कारण हैं।
मध्य प्रदेश में तीन मौसम प्रणालियों के कारण अधिकांश जिलों में वर्षा जारी है। बुधवार को वर्षा में थोड़ी कमी देखी गई, हालांकि सीहोर में सर्वाधिक 43 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई। मौसम विभाग ने गुरुवार के लिए श्योपुर और शिवपुरी में भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया है। लगातार वर्षा से दिन के तापमान में गिरावट आई है। इस बीच, बुधवार को बंगाल की खाड़ी में एक नया निम्न दबाव क्षेत्र बन गया है, जिसका प्रभाव 15 अगस्त से राज्य में दिखेगा और तेज वर्षा का नया दौर शुरू होगा।
मध्य प्रदेश में इस वर्ष मानसून की स्थिति औसत से 19 प्रतिशत कम वर्षा के साथ बनी हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 20 प्रतिशत और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 18 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इंदौर संभाग के अधिकांश जिले, बुरहानपुर, खरगोन और देवास को छोड़कर, औसत से कम वर्षा से प्रभावित हैं। इंदौर जिले में औसत से 10 प्रतिशत और इंदौर शहर में 133.2 मिमी कम बारिश हुई है। वर्तमान में उत्तर-पूर्व मध्य प्रदेश पर एक कम दबाव का क्षेत्र और अन्य मौसम प्रणालियाँ सक्रिय हैं, जिससे पूर्वी मध्य प्रदेश में अच्छी बारिश हो रही है।
सागर जिले में अब तक सामान्य से 63 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जहां इस सीजन में कुल 455 मिमी (17.9 इंच) वर्षा हुई है, जबकि सामान्य बारिश 1230.5 मिमी है। पिछले 24 घंटों में बीना में पौने 4 इंच और राहतगढ़ में 3 इंच बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार, मध्य प्रदेश के ऊपर से गुजर रही ट्रफ लाइन और पश्चिम बंगाल पर बने निम्न दबाव क्षेत्र के कारण आगामी दिनों में तेज बारिश की संभावना है। पिछले साल 10 अगस्त तक 32.3 इंच बारिश हुई थी, जो इस वर्ष की तुलना में 44 प्रतिशत अधिक थी।
मध्य प्रदेश में मूसलाधार बारिश ने जनजीवन प्रभावित किया है। राजगढ़ जिले में नाले में कार बहने से उसमें सवार 11 लोगों में से 9 के शव बरामद किए गए हैं। राजधानी भोपाल में सोमवार रात चार साल बाद रिकॉर्ड 175.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जिससे शहर के निचले इलाकों और प्रमुख सड़कों पर पानी भर गया। मौसम विशेषज्ञ अजय शुक्ला के अनुसार, यह इस सीजन की सबसे तेज बारिश थी। प्रदेश में दो मानसूनी सिस्टम सक्रिय हैं, जिससे 14 अगस्त तक हल्की से मध्यम वर्षा जारी रहने की संभावना है। विदिशा, सीहोर, रायसेन और गुना सहित अन्य जिलों में भी नदियां उफान पर हैं और जलभराव की स्थिति बनी हुई है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि इस मानसून में मध्य प्रदेश में औसत से 15 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। उन्होंने सोमवार को मंत्रालय में मंत्रियों और अधिकारियों के साथ बैठक कर कम वर्षा से उत्पन्न स्थितियों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को किसानों और नागरिकों को किसी भी परेशानी से बचाने के लिए पहले से तैयारी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने रबी फसलों के लिए किसानों को प्रेरित करने, कम वर्षा में उगने वाली फसलों को प्राथमिकता देने, खाद-बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने और आपदा प्रबंधन व राहत कार्यों के लिए सक्रिय रहने के निर्देश दिए।
देवास के नेमावर में नर्मदा नदी का जलस्तर कैचमेंट क्षेत्र में लगातार वर्षा के कारण बढ़ गया है। वर्तमान में यह खतरे के निशान 885 फीट से लगभग 10 फीट नीचे 875 फीट पर है। प्रशासन ने अप्रिय घटना रोकने के लिए हरियाली अमावस्या पर नर्मदा के घाटों पर स्नान प्रतिबंधित कर दिया है। खातेगांव के एसडीएम राजेंद्र पंवार ने नेमावर सहित खातेगांव और हरणगांव क्षेत्र के सभी तटों पर स्नान पर रोक के आदेश जारी किए हैं। निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति नहीं है, पर सतर्कता की सलाह दी जा रही है। नागर और सिद्धनाथ घाट आधे से अधिक डूब चुके हैं, जबकि श्रद्धालु अमावस्या स्नान के लिए पहुँच चुके हैं।
मध्यप्रदेश में इस वर्ष मानसून की बेरुखी जारी है, जहां अब तक औसत से 19 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। पूर्वी मध्यप्रदेश में 20 प्रतिशत और पश्चिमी मध्यप्रदेश में 18 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इंदौर संभाग के अधिकांश जिलों में भी वर्षा की कमी का असर दिख रहा है, जबकि इंदौर शहर में औसत से 133.2 मिमी कम बारिश हुई है। अगले सप्ताह इंदौर संभाग में प्रभावी मानसून सिस्टम के अभाव में छिटपुट वर्षा की संभावना है, हालांकि उज्जैन और आलीराजपुर में अच्छी वर्षा के आसार हैं।
ग्वालियर अंचल में रविवार को वर्षा दर्ज नहीं की गई, हालांकि रात में 4.5 मिमी वर्षा हुई। दिन का तापमान 34.5 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, मानसून ट्रफ ग्वालियर-चंबल के ऊपर से गुजर रही है और पूर्वोत्तर मध्य प्रदेश पर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इन प्रणालियों के कारण सोमवार को भारी वर्षा तथा आगामी चार दिनों तक हल्की से तेज वर्षा की संभावना है, जिससे तापमान में गिरावट आएगी। पिछले दो दिनों से कम वर्षा के कारण तापमान बढ़ रहा है, जबकि धान की रोपाई अंतिम दौर में है।
मध्यप्रदेश में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है, जिसके चलते 21 जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने राजगढ़, विदिशा, सीहोर, हरदा और देवास में अगले 24 घंटों में लगभग 8 इंच बारिश की चेतावनी दी है। भोपाल में रविवार रात से ही तेज बारिश जारी है। हालांकि, प्रदेश में अब तक कुल बारिश सामान्य से 19 प्रतिशत कम है, जिसमें पूर्वी मध्यप्रदेश में 20 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 18 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। अगले दो दिनों तक मानसूनी गतिविधियां सक्रिय रहने की संभावना है।